रांची की ओर रवाना हुआ हो भाषा-साहित्य का कारवां, राजभाषा दिवस समारोह में शामिल होंगे पश्चिमी सिंहभूम के साहित्यकार

चाईबासा: आदिवासी हो द्वितीय राजभाषा दिवस समारोह-सह-कवि संगोष्ठी में शामिल होने के लिए रविवार को पश्चिमी सिंहभूम के बड़ी संख्या में हो साहित्यकार, कवि, लेखक और भाषा प्रेमी रांची के लिए रवाना हुए। चाईबासा के तांबो चौक से साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों का कारवां चारपहिया वाहनों से रांची की ओर रवाना हुआ।

रवानगी के दौरान तांबो चौक पर भावुक माहौल देखने को मिला। आदिवासी सामाजिक संगठनों के लोगों ने साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों को शुभकामनाएं देकर विदा किया। इस दौरान अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति लोगों का उत्साह साफ नजर आया।
रांची के धुर्वा स्थित पुराने विधानसभा भवन के अतिथि सभागार में 15वें आदिवासी हो द्वितीय राजभाषा दिवस समारोह-सह-कवि संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में हो भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा।
रांची जाने वालों में हो भाषा साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली, तिलक बारी, काशराय कुदादा, मानकी सावैयां, सुनील हेंब्रम, उदय चंद्र बोदरा, चंद्रिका कोडांकेल, रमेश सावैयां, बबलू सावैयां, सुरेंद्र पुरती, इंदू तियू और वीरसिंह बुड़ीउली सहित कई साहित्यकार शामिल हैं। टाटा कॉलेज चाईबासा के टीआरएल विभाग के छात्र-छात्राएं भी समारोह में भाग लेंगे।
साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली ने कहा कि हो भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने की जरूरत है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की पहचान और सांस्कृतिक विरासत भी है।




