*22 दिन बाद रांजाबुरु खदान का अनिश्चितकालीन आंदोलन स्थगित, प्रशासन को 5 अक्टूबर तक का समय*

चाईबासा: स्थानीय रोजगार, खदान प्रभावित गांवों के विकास और पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू कराने की मांग को लेकर पश्चिम सिंहभूम के सेल, गुवा की रांजाबुरु खदान में 10 अगस्त से चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को 22 दिनों बाद फिलहाल स्थगित कर दिया गया। जगन्नाथपुर के एसडीओ अरुण उरांव और नोवामुंडी के बीडीओ पप्पू रजक आंदोलन स्थल पहुंचे और ग्रामीणों के साथ वार्ता की। अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों को जूस पिलाकर आंदोलन स्थगित कराया गया।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में पूर्व में मां सरला नामक ठेका कंपनी के साथ हुए लिखित समझौते का अनुपालन, खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, रैक लोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय लोगों की भागीदारी तथा अन्य स्थानीय कार्यों में ग्रामीणों को अवसर देना शामिल है।
मुखिया राजू सांडिल ने बताया कि एसडीओ अरुण उरांव और बीडीओ पप्पू रजक के आग्रह पर फिलहाल आंदोलन स्थगित किया गया है। प्रशासन ने ग्रामीणों को उनकी मांगों के समाधान की दिशा में पहल करने तथा जल्द ही उपायुक्त और सेल प्रबंधन के साथ वार्ता कराने का भरोसा दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन को 5 अक्टूबर तक का समय दिया है। इस अवधि में सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
वार्ता के दौरान खदान से निकलने वाले कथित लाल पानी से प्रभावित गांवों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। राजू सांडिल के अनुसार, एसडीओ अरुण उरांव ने प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का स्वयं निरीक्षण करने की बात कही है। ग्रामीणों ने बताया कि लाल पानी के कारण प्राकृतिक जलस्रोत और कृषि भूमि प्रभावित होने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
इसके अलावा सीएसआर गांवों में शिक्षकों की कमी, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं भी अधिकारियों के समक्ष रखी गईं। ग्रामीणों ने कहा कि खनन क्षेत्र से प्रभावित गांवों के विकास और स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए ठोस पहल जरूरी है।
22 दिनों तक चले आंदोलन के दौरान भारी बारिश के बावजूद ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे। स्वतंत्रता दिवस के दिन भी आंदोलन स्थल पर तिरंगा फहराकर देशभक्ति के नारे लगाए गए।
राजू सांडिल ने कहा कि प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन स्थगित किया गया है। 5 अक्टूबर तक प्रशासन की पहल और मांगों पर होने वाली कार्रवाई को देखा जाएगा। सकारात्मक पहल नहीं होने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
आंदोलन स्थगित किए जाने के दौरान मानकी लागुड़ा देवगम, मुखिया राजू सांडिल, मुंडा बुधराम सिद्धू, मुंडा कुशू देवगम, मुंडा जामदेव चाम्पिया, मुंडा जानुम सिंह चेरोवा, मुंडा लेबेया देवगम, मुंडा राजेश टोपनो, सुमित दास, राजू समेत विभिन्न गांवों के ग्रामीण और महिलाएं मौजूद थीं।




