कोल्हानचाईबासा

सरकारी स्कूलों की 6ठीं से 8वीं कक्षा के लिए जनजातीय भाषा की बन रही हैं पुस्तकें, टाटा स्टील फाउंडेशन के विशेषज्ञ दे रहे सहयोग*

चाईबासा: झारखंड के सरकारी विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए जनजातीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया जा रहा है। पुस्तक निर्माण के इस कार्य में टाटा स्टील फाउंडेशन के अनुभवी रिसोर्स पर्सन (विशेषज्ञों) का सहयोग लिया जा रहा है।

वर्तमान में झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT), रांची में पुस्तक निर्माण को लेकर एक कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस कार्यशाला में राज्य की प्रमुख जनजातीय भाषाओं में संताली, कुड़ुख, मुंडारी, हो और खड़िया की पुस्तकों का निर्माण किया जा रहा है।

पुस्तक लेखन का मुख्य कार्य सरकारी शिक्षक और शिक्षिकाओं द्वारा किया जा रहा है, जिनकी प्रतिनियुक्ति विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए की गई है। पुस्तकों को अधिक गुणवत्तापूर्ण, सटीक और भाषाई दृष्टि से समृद्ध बनाने के लिए टाटा स्टील फाउंडेशन ने अपने विषय विशेषज्ञों को इस अभियान से जोड़ा है। ये विशेषज्ञ पुस्तकों के वाक्य विन्यास, शब्दार्थ और व्याकरणात्मक संरचना को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण तकनीकी और भाषाई सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

विभिन्न भाषाओं के लिए टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से शामिल विशेषज्ञ निम्नलिखित हैं:

* **हो भाषा:** नरेश देवगम, कृष्ण चंद्र बोदरा, जगन्नाथ हांसदा और सोमा जेराई।

* **कुड़ुख भाषा:** बिंदु पाहन, भुवनेश्वर उरांव, गीता कोया और किरण खलखो।

* **संताली भाषा:** लेदेम मार्डी, नयन मुर्मू, भागीरथी मुर्मू और सालखन मुर्मू।

* **मुंडारी भाषा:** सुनिता तिड़ू, सलोनी मुंडु, बिरसा पूर्ति और रायमुनी मुंडा।

इस पूरे शैक्षणिक एवं भाषाई कार्य में टाटा स्टील फाउंडेशन के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर शिव शंकर कांडेयांग का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। विशेषज्ञों और शिक्षकों के इस संयुक्त प्रयास से जनजातीय वर्ग के बच्चों को अपनी मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण और व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे उनकी नींव मजबूत होगी।

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