कोल्हानचाईबासा

बज्म-ए-मुशायरा में गूंजे देशभक्ति और सामाजिक सरोकार के कलाम

चाईबासा:प्रकाश गुप्ता:80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अंजुमन इस्लामिया चाईबासा की ओर से उर्दू लाइब्रेरी में बज्म-ए-मुशायरा का आयोजन किया गया। झारखंड और ओडिशा सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे मशहूर शायरों और फनकारों ने देशभक्ति, स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों, सामाजिक परिस्थितियों और मौजूदा हालात पर अपने कलाम पेश किए।

मुशायरे में दानिश हम्माद जाज़िब, फारीज़ हम्माद, सालिक अदीब, शम्स पुरुल्यावी, तन्हा तारिक, साबिर नवादवी, असर भागलपुरी और अजय माहताब ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को प्रभावित किया। शायरों ने देश की एकता, भाईचारे, सामाजिक जिम्मेदारी और आजादी के संघर्ष को अपनी शायरी के माध्यम से सामने रखा।

अंजुमन इस्लामिया के सचिव फैयाज खान उर्फ बल्लो खान ने सभी शायरों और उपस्थित लोगों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस देश को आजाद कराने वाले वीरों की कुर्बानियों को याद करने का अवसर है। उन्होंने आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करने की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

फैयाज खान ने कहा कि वर्तमान समय में समाज के सामने कई चुनौतियां हैं। ऐसे दौर में साहित्य और शायरी लोगों को जोड़ने तथा सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि उर्दू अदब हमेशा इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे और देशप्रेम का संदेश देता रहा है।

उन्होंने हिंदी और उर्दू में देशप्रेम तथा एकता का संदेश देते हुए आजादी की कुर्बानियों को समर्पित पंक्तियां भी प्रस्तुत कीं। मुशायरे के दौरान श्रोताओं ने तालियों के साथ शायरों का उत्साह बढ़ाया और देर तक कार्यक्रम का आनंद लिया।

समापन पर अंजुमन इस्लामिया की ओर से सभी शायरों और फनकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में संस्था के पदाधिकारी, सदस्य और स्थानीय लोग मौजूद रहे। मुशायरे के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस पर देशप्रेम, सामाजिक एकता, भाईचारे और शहीदों की कुर्बानियों का संदेश दिया गया।

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