2027 की जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मांग, दिल्ली में राष्ट्रीय संवाद में बनी साझा रणनीति

चाईबासा: आगामी 2027 की जनगणना में आदिवासी समुदाय के लिए अलग धर्म कोड की मांग को लेकर पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा से प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संवाद में भाग लिया। 29 और 30 अगस्त को झांसी रोड स्थित डॉ. आंबेडकर भवन में राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की पहल पर आयोजित संवाद में देश के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और युवा शामिल हुए।
बैठक में आदिवासी समुदाय की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को आगामी जनगणना में स्वतंत्र रूप से दर्ज कराने और अलग धर्म कोड की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी तरीके से उठाने पर चर्चा हुई। साथ ही विभिन्न संगठनों के बीच व्यापक सहमति बनाने तथा साझा रणनीति तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया।
संवाद के दौरान धर्म कोड के नाम और स्वरूप में एकरूपता लाने, विभिन्न राज्यों में चल रहे प्रयासों को साझा मंच से जोड़ने और आदिवासी समाज के बीच व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई।
प्रतिनिधियों ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को आधिकारिक रूप से दर्ज करने का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में आदिवासी समुदाय की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं, प्रकृति आधारित आस्था, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को अलग धार्मिक पहचान के रूप में दर्ज किए जाने की आवश्यकता है।
बैठक में भारत सरकार और संबंधित जनगणना प्राधिकरण के समक्ष मांग को तथ्यात्मक एवं लोकतांत्रिक तरीके से रखने पर जोर दिया गया। इसके लिए दस्तावेजी प्रमाण जुटाने, जनसमर्थन बढ़ाने, विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने और चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाने की रणनीति पर चर्चा हुई।
राष्ट्रीय संवाद में निर्णय लिया गया कि देशभर के आदिवासी संगठनों, बुद्धिजीवियों, युवा एवं महिला संगठनों तथा सामाजिक प्रतिनिधियों के बीच लगातार संवाद कायम किया जाएगा। विभिन्न राज्यों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सरकार के समक्ष सामूहिक रूप से मांग रखने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा से शामिल प्रतिनिधिमंडल ने भी आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को 2027 की जनगणना में उचित स्थान दिलाने के अभियान में सक्रिय भागीदारी जारी रखने की सहमति जताई।
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चाईबासा से बड़ी खबर है कि 2027 की जनगणना में आदिवासी समुदाय के लिए अलग धर्म कोड की मांग को लेकर नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय संवाद आयोजित किया गया। 29 और 30 अगस्त को डॉ. आंबेडकर भवन में हुए इस संवाद में देशभर के आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और युवा शामिल हुए। बैठक में आदिवासी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को जनगणना में स्वतंत्र रूप से दर्ज कराने पर चर्चा हुई। साथ ही साझा रणनीति, जनजागरूकता अभियान, दस्तावेजी प्रमाण और सरकार के समक्ष लोकतांत्रिक तरीके से मांग रखने की योजना पर विचार किया गया। चाईबासा प्रतिनिधिमंडल ने भी अभियान में सक्रिय भागीदारी की सहमति जताई।




