डुमरिया में दो साल से अधूरा पड़ा सिंचाई नाला, मजदूरों के 60 हजार रुपये बकाया; किसानों की बढ़ी परेशानी

डुमरिया (पूर्वी सिंहभूम)। पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत केंदुआ पंचायत के बोमरो गांव में सिंचाई नाले का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से अधूरा पड़ा है। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से जहां किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पा रही है, वहीं दूसरी ओर मजदूरों की करीब 60 हजार रुपये की मजदूरी बकाया होने का मामला भी सामने आया है। इससे ग्रामीणों और किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, हेंडेगोड़ा सिंचाई नाले का निर्माण जिला परिषद फंड से कराए जाने की बात कही गई थी। इस योजना से उम्मीद थी कि क्षेत्र के किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में सुविधा मिलेगी और खेती-किसानी के दौरान सिंचाई की समस्या कम होगी। लेकिन लंबे समय से निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारण योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है।
दो साल बाद भी निर्माण अधूरा
ग्रामीण क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा कृषि उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में सिंचाई नाले का निर्माण अधूरा रहने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को उम्मीद थी कि नाला तैयार होने के बाद खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से यह उम्मीद अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
मजदूरों की 60 हजार रुपये मजदूरी बकाया
इस मामले में मजदूरों की मजदूरी बकाया होने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों का करीब 60 हजार रुपये भुगतान लंबित है। मजदूरी का भुगतान नहीं होने से संबंधित मजदूरों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, बकाया राशि के भुगतान की स्थिति और जिम्मेदार पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।
योजना की जानकारी देने वाला बोर्ड भी नहीं
ग्रामीणों के मुताबिक, निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। ऐसे में योजना की लागत, स्वीकृत राशि, निर्माण अवधि और कार्य कराने वाली एजेंसी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट नहीं हो पा रही हैं। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह की जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की उम्मीद
अब ग्रामीणों और किसानों की मांग है कि संबंधित विभाग मामले की जांच करे, अधूरे निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने की दिशा में कार्रवाई करे और मजदूरों की बकाया मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही योजना से जुड़ी आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करने की भी जरूरत है, ताकि ग्रामीणों को पता चल सके कि निर्माण कार्य कब तक पूरा होगा और उन्हें सिंचाई सुविधा का लाभ कब मिलेगा।
फिलहाल, दो साल से अधूरे पड़े सिंचाई नाले और मजदूरों की बकाया मजदूरी का मामला स्थानीय स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कब तक कदम उठाता है और किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल पाती है या नहीं




