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चाईबासापश्चिमी सिंहभूम

मंझारी में 59 शिक्षकों को बच्चों की दृष्टि जांच का प्रशिक्षण, स्कूल स्तर पर होगी प्रारंभिक स्क्रीनिंग

राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण, दृष्टि में कमी मिलने पर विशेषज्ञ से जांच कराने की दी जानकारी

मंझारी: राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत बच्चों के दृष्टि सर्वेक्षण को लेकर प्रखंड सभागार मंझारी में शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में मंझारी प्रखंड के कुल 59 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हिस्सा लिया। सदर अस्पताल चाईबासा के नेत्र पदाधिकारी डॉ. मनोज सिंह मुंडा ने शिक्षकों को बच्चों की प्रारंभिक नेत्र जांच करने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि दृष्टि चार्ट या ई-चार्ट की मदद से बच्चों की दृष्टि का आसानी से सर्वेक्षण किया जा सकता है। जांच के दौरान यदि किसी बच्चे की दृष्टि में कमी पाई जाती है तो आगे की नेत्र जांच और चश्मे की आवश्यकता का परीक्षण नेत्र चिकित्सक या नेत्र विशेषज्ञ से कराना जरूरी है। डॉ. मनोज सिंह मुंडा ने शिक्षकों से कहा कि विद्यालय स्तर पर बच्चों की दृष्टि की शुरुआती जांच होने से आंखों से संबंधित समस्याओं का समय पर पता लगाया जा सकता है और जरूरत के अनुसार बच्चों को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सदर अस्पताल चाईबासा के पैथोलॉजिस्ट चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एनके सुंडी ने कहा कि आंखें बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं और बच्चों की आंखों की सुरक्षा तथा समय पर दृष्टि संबंधी समस्या की पहचान के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण देना आवश्यक है। सदर अस्पताल चाईबासा के अस्पताल मैनेजर आशीष कुमार ने कहा कि आंखों से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या होने पर मरीजों को नेत्र चिकित्सालय में जाकर जांच और उपचार कराना चाहिए। समय पर जांच कराने से समस्या की पहचान और उचित उपचार में मदद मिल सकती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रखंड संसाधन केंद्र के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी जितेंद्र केसरी, प्रखंड संसाधन सेवी देबू दत्ता, संकुल साधन सेवी सुमन यादव सहित मंझारी प्रखंड के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों को बच्चों की प्रारंभिक दृष्टि जांच की प्रक्रिया तथा दृष्टि में कमी पाए जाने पर आगे की जांच एवं उपचार के लिए उचित स्तर पर भेजने की जानकारी दी गई। इससे विद्यालयों में बच्चों की दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान करने में मदद मिलेगी।

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