
गोइलकेरा।प्रकाश गुप्ता :गोइलकेरा प्रखंड के सुदूरवर्ती आराहासा पंचायत स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र के समीप बइपी मैदान में रविवार को प्रखंड स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समारोह में प्रखंड के विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों, मानकी-मुंडा संघ के सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, विद्यार्थियों तथा संबंधित विभागों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों एवं उपस्थित लोगों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद विश्व आदिवासी दिवस के उद्देश्य, आदिवासी समाज की वर्तमान चुनौतियों तथा भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान
समारोह के दौरान सामाजिक, शैक्षणिक एवं विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं गोइलकेरा प्रखंड के विभिन्न उच्च विद्यालयों एवं प्लस टू विद्यालयों में मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।

आयोजकों ने कहा कि विद्यार्थियों को सम्मानित करने का उद्देश्य शिक्षा के प्रति उनमें उत्साह बढ़ाना और अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में विभिन्न मानकी-मुंडा एवं आदिवासी समाजों के सामाजिक प्रतिनिधियों को भी समाज, संस्था, विद्यालय एवं क्षेत्र के प्रति उनके उत्कृष्ट कार्य, समर्पण, अनुशासन, लगन और सराहनीय योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
हर वर्ष अलग-अलग पंचायतों में आयोजित होगा प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम
समारोह को संबोधित करते हुए तरकाडकोचा पंचायत के मुखिया एवं समाजसेवी गणेश मुखिया ने कहा कि अब तक प्रखंड अथवा जिला मुख्यालय में आयोजित होने वाले अधिकांश बड़े कार्यक्रमों में सुदूरवर्ती गांवों के ग्रामीणों की अपेक्षित सहभागिता नहीं हो पाती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष प्रखंड स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस समारोह का आयोजन आराहासा जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्र में किया गया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भी प्रयास किया जाएगा कि प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम अलग-अलग पंचायतों में आयोजित हो। इससे दूर-दराज के ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ेगी और सरकारी एवं सामाजिक स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों का लाभ गांव-गांव तक पहुंच सकेगा।
आदिवासी भाषा, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक भाषा, शिक्षा, संवैधानिक अधिकार, सामाजिक एकजुटता, जल-जंगल-जमीन तथा ग्रामसभा की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय के साथ आदिवासी समाज को शिक्षा के क्षेत्र में और आगे बढ़ने की आवश्यकता है। साथ ही अपनी पारंपरिक भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक पहचान को संरक्षित रखना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने युवाओं और विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया।
समारोह को महेंद्र कोड़ाह, कृष्ण डांगिल, घासीराम पाड़ेया, जिला परिषद सदस्य ज्योति मेराल, डॉ. मनोज कुमार कोड़ाह, डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई, आदिवासी हो समाज महासभा के प्रखंड अध्यक्ष पातोर जोंको, प्रखंड प्रमुख निरुमानी कोड़ाह, प्रखंड विकास पदाधिकारी विवेक कुमार, सोनाराम कोड़ाह एवं जोंको अंगरिया ने भी संबोधित किया।
बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि और ग्रामीण रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मण पुरती एवं दीपिका लकड़ा ने किया। समारोह में सुनीता मेराल, पाटेल मेराल, राम हरि संडिल, सवान संडिल, मानाराम हेम्ब्रोम, ओयबोन हेम्ब्रोम, लकिन्द्र कोड़ाह, मानसिंह कोड़ाह, उदय चेरोवा, सिकन्दर जोंको, लुदगु केराई, द्रोपती पूर्ति, घनश्याम अंगरिया, जुरेन्द्र अंगरिया और मलकेन्द्र अंगरिया समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा मानकी-मुंडा संघ, आदिवासी हो समाज महासभा तथा विभिन्न आदिवासी समाजों के सामाजिक प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थानों के प्रधानाचार्य, विद्यार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता, संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं गणमान्य लोगों ने समारोह में सहभागिता की।
समारोह के माध्यम से आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा, सामाजिक एकजुटता और ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने का संदेश दिया गया।




