Jamshedpur : मंईयां का सम्मान या अपमान ! फॉर्म भरवाने व सत्यापन की बात कहने वाले जिम्मेदार रोज बुला रहे कार्यालय
जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय में फॉर्म सत्यापन को लेकर हंगामा, महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की
जमशेदपुर : वर्ष 2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले लोक लुभावन व महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की शुरूआत की गई. लाखो महिलाओं से योजना का लाभ देने के लिए फॉर्म भरवाए गए। कई महिलाओं के खाते में आनन-फानन में सम्मान राशि भेजी गई। जबकि कई महिलाएं आज भी योजना के लाभ से वंचित हैं. इस योजना के लिए सरकार की ओर से नए-नए नियम एवं शर्ते जोड़ दी गई हैं। जिससे महिलाएं परेशान हैं. आलम यह है कि योजना के लाभ से सैकड़ो महिलाएं रोज सरकारी कार्यालयों का चक्कर काट रही हैं।
पूर्वी सिंहभूम जिले में शहरी क्षेत्र की महिलाओं का फॉर्म जमा लेने व सत्यापन की जिम्मेदारी अंचल कार्यालय को मिली है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र की जवाबदेही प्रखंड कार्यालय की है। सोमवार को महिलाओं के सब्र का बांध तब टूट गया, जब उन्हें बताया गया कि अभी योजना का सत्यापन कार्य बंद कर दिया गया है।
यह सुनकर महिलाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। भीषण गर्मी और उमस के बीच दूर-दराज से पहुंची महिलाओं ने जमकर बवाल काटा। मंगलवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं को कार्यालय में बताया गया कि सत्यापन का कार्य नहीं किया जा रहा है। इसके बाद महिलाओं का आक्रोश फूट पड़ा और कार्यालय परिसर में हंगामा शुरू हो गया।

हालात बिगड़ते देख मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी। आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं को कार्यालय परिसर से बाहर कर गेट बंद कर दिया, जिससे महिलाओं में और नाराजगी बढ़ गई। मौके पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमी भी साफ नजर आई।
महिलाओं का कहना है कि पहले योजना की राशि नियमित मिल रही थी, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भुगतान बंद हो गया है। इसी वजह से वे मजबूरी में इस भीषण गर्मी में घंटों लाइन लगाने को विवश हैं। महिलाओं ने सवाल उठाया कि जब सत्यापन करना ही नहीं था, तो उन्हें बुलाया क्यों गया।
महिलाओं ने सरकार और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान महिलाओं को सम्मान और लाभ देने की बड़ी-बड़ी बातें की गई थीं, लेकिन अब उन्हें सिर्फ परेशान किया जा रहा है।
वहीं आजसू पार्टी के नेता कृतिवास मंडल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं को सत्यापन के नाम पर परेशान किया जा रहा है और उनकी पार्टी इसका विरोध करती है।
फिलहाल प्रखंड कार्यालय में अव्यवस्था और महिलाओं की परेशानी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है।




