
चाईबासा: टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले में शुक्रवार को सदर अस्पताल, चाईबासा में जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त मनीष कुमार ने 128 टीबी मरीजों के बीच पोषक आहार (फूड बास्केट) का वितरण किया। इनमें 27 मरीजों को प्रथम माह तथा 101 मरीजों को तृतीय माह का फूड बास्केट उपलब्ध कराया गया। इस दौरान सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिवचरण हांसदा एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. जगन्नाथ हेंब्रम भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टीबी मरीजों को उपचार के साथ पोषण और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना था। निक्षय मित्र अभियान के तहत कई प्रशासनिक अधिकारियों और संस्थानों ने मरीजों को गोद लेने की पहल की। अपर उपायुक्त किस्टो कुमार बेसरा ने 10 टीबी मरीजों को गोद लिया, जबकि तांतनगर के प्रखंड विकास पदाधिकारी पवन आशीष लकड़ा ने तीन मरीजों की जिम्मेदारी ली। पीएम श्री 10+2 गर्ल्स हाई स्कूल, चाईबासा की प्राचार्या बीना कुमारी सिंह ने दो मरीजों तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला खाता प्रबंधक ने पांच मरीजों को निक्षय मित्र बनकर सहयोग देने का संकल्प लिया।

इसके अलावा तांतनगर प्रखंड के दो पंचायत सचिवों ने तीन टीबी मरीजों को तथा जिला कल्याण कार्यालय की एक महिला सुपरवाइजर और दो लिपिकों ने कुल चार मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार और पोषण संबंधी सहायता का दायित्व संभाला।
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि टीबी पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है और इसे सामूहिक प्रयासों से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दवाओं के साथ संतुलित एवं पौष्टिक आहार मरीजों के शीघ्र स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि उपचार के दौरान किसी भी मरीज को पोषण संबंधी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि निक्षय मित्र पहल समाज में सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जब प्रशासन, विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षण संस्थान, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक एक साथ जुड़ते हैं, तो टीबी उन्मूलन का लक्ष्य और अधिक मजबूत होता है। उन्होंने सक्षम नागरिकों एवं संस्थानों से अधिक से अधिक टीबी मरीजों को गोद लेकर इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
कार्यक्रम में उपस्थित मरीजों को नियमित रूप से दवा लेने, पौष्टिक भोजन करने, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने तथा चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए भी जागरूक किया गया। जिला प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य विभाग और समाज के संयुक्त प्रयासों से पश्चिमी सिंहभूम को निर्धारित समय सीमा के भीतर टीबी मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जाएगा।




