परिसीमन के नाम पर आदिवासियों को भ्रमित करना बंद करें कांग्रेस-झामुमो : चंद्रमोहन तीउ, भूषण पाट पिंगुवा

चाईबासा। परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस और झामुमो नेताओं द्वारा भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व सांसद गीता कोड़ा के बयान को कथित रूप से तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने पर भाजपा युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष चंद्रमोहन तीउ और जिला महामंत्री भूषण पाट पिंगुवा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

दोनों भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और झामुमो परिसीमन को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर आदिवासी समाज को गुमराह करने और क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन राजनीतिक भय या अफवाह का विषय नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया है।
चंद्रमोहन तीउ और भूषण पाट पिंगुवा ने कहा कि पूर्व में हुए परिसीमन के दौरान अलग-अलग राज्यों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों में बदलाव हुए हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ और ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन का परिणाम संबंधित राज्य की जनसंख्या और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर निर्धारित होता है। इसलिए इसे पहले से किसी एक वर्ग के खिलाफ बताना भ्रम फैलाने जैसा है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि गीता कोड़ा के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने से पहले कांग्रेस और झामुमो के प्रवक्ताओं को संवैधानिक विषयों की बेहतर समझ विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समाज की इतनी ही चिंता है तो अपने शासन का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। भाजपा नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज के सामने वनाधिकार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक पहचान जैसे वास्तविक मुद्दे हैं, लेकिन इन पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक विवाद खड़े किए जा रहे हैं।
उन्होंने कांग्रेस-झामुमो से वन पट्टा, छात्रवृत्ति, आवास, नल-जल, पेंशन, रोजगार तथा ग्रामीण स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जनता के बीच जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि परिसीमन के नाम पर आदिवासी समाज को डराने और भ्रमित करने की राजनीति नहीं चलनी चाहिए।




