फ्लैट से निकलने वाले दूषित पानी से परेशान ग्रामीण, छह साल से कार्रवाई का इंतजार; समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
उत्तरी कीताडीह की जीएल चर्च बस्ती में बढ़ा विवाद, ग्रामीणों ने बिल्डर पर दूसरे की जमीन पर गंदा पानी बहाने का लगाया आरोप

जमशेदपुर। जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत उत्तरी कीताडीह की जीएल चर्च बस्ती में फ्लैट से निकलने वाले दूषित पानी को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि ओसिस अपार्टमेंट से निकलने वाला गंदा और दूषित पानी कथित तौर पर जबरन तारामणि टोपनो की जमीन की ओर बहाया जा रहा है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के कारण इलाके में गंदगी और दुर्गंध की स्थिति बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और बिल्डर के समक्ष शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों के अनुसार, इस मामले को लेकर जमशेदपुर के उप विकास आयुक्त और अंचल अधिकारी को भी कई बार लिखित ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई। इसके बावजूद लगभग छह वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
जमीन की मालकिन ने छह वर्षों से कार्रवाई नहीं होने का लगाया आरोप
तारामणि टोपनो ने बताया कि उनके जमीन के आसपास लगातार दूषित पानी जमा होने और बहने के कारण काफी परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि फ्लैट से निकलने वाले पानी की उचित निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदा पानी उनकी जमीन की ओर बहाया जा रहा है। इससे आसपास गंदगी के साथ-साथ दुर्गंध भी बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि कई बार स्थानीय लोगों के सहयोग से प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन देकर समस्या का समाधान कराने की मांग की गई, लेकिन अब तक बिल्डर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि दूषित पानी के कारण आसपास का वातावरण प्रभावित हो रहा है और बीमारी फैलने की आशंका भी बनी हुई है। स्थिति ऐसी हो गई है कि घर में रहना भी मुश्किल महसूस हो रहा है।
बिल्डिंग के नक्शे और जल निकासी व्यवस्था की जांच की मांग
मामले को लेकर भाजपा नेता लालन यादव ने भी बिल्डर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल्डर की मनमानी के कारण बस्ती के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने प्रशासन से लेकर अंचल अधिकारी तक लिखित शिकायत की है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया।
लालन यादव ने मांग की कि संबंधित फ्लैट के निर्माण से जुड़े स्वीकृत नक्शे की जांच कराई जाए। इसके साथ ही भवन में जल निकासी की क्या व्यवस्था निर्धारित की गई थी और वास्तविक रूप से उसका पालन किया गया या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने वाटर हार्वेस्टिंग और दूषित पानी की उचित निकासी की व्यवस्था की स्थिति की भी जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि किसी भवन के निर्माण के कारण आसपास रहने वाले ग्रामीणों की जमीन और जनजीवन प्रभावित हो रहा है, तो प्रशासन को मामले की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
मुखिया ने ग्राम सभा और नियमों के पालन की जांच की उठाई मांग
उत्तरी कीताडीह के मुखिया मनोज मुर्मू ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में फ्लैट निर्माण के दौरान ग्राम सभा और निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्लैट से निकलने वाले गंदे पानी को दूसरे की जमीन की तरफ बहाया जा रहा है, जिसके कारण आसपास के लोगों को दुर्गंध और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है।
मुखिया ने कहा कि स्थानीय लोगों की परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराकर उचित समाधान निकालने की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि बस्ती के पास चर्च स्थित है, जहां प्रार्थना और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए लोग पहुंचते हैं। दूषित पानी और दुर्गंध के कारण वहां आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रविवार को होगी ग्राम सभा, बिल्डर को बुलाने की तैयारी
ग्रामीणों ने बताया कि समस्या के समाधान को लेकर रविवार को ग्राम सभा आयोजित की जाएगी। ग्राम सभा में संबंधित बिल्डर को भी बुलाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों के सामने पूरे मामले पर चर्चा हो सके और समस्या के समाधान का रास्ता निकाला जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ग्राम सभा में बिल्डर उपस्थित नहीं होते हैं या दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता है, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर सड़क जाम करने और दूषित पानी की निकासी को रोकने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि वे लंबे समय से प्रशासन से समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होता है और आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी की समस्या केवल एक व्यक्ति या एक जमीन से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इससे पूरे आसपास के वातावरण पर असर पड़ रहा है। पानी के कारण गंदगी और दुर्गंध फैलने से लोगों को रोजमर्रा के जीवन में परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि फ्लैट से निकलने वाले पानी की निकासी के लिए स्वीकृत व्यवस्था क्या है। साथ ही यदि किसी नियम का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर रविवार को होने वाली ग्राम सभा पर है। अब देखना होगा कि ग्राम सभा में बिल्डर और प्रशासन की ओर से क्या रुख सामने आता है और छह वर्षों से चली आ रही दूषित पानी की समस्या का कोई स्थायी समाधान निकल पाता है या नहीं।
विरोध और समस्या को लेकर आवाज उठाने वालों में मुखिया मनोज मुर्मू, भाजपा नेता लालन यादव, जमीन मालकिन तारामणि टोपनो, अनुराग मिंज, केवल बारला, दीपक होनहागा, हेमंत सोरेन, जस्मीन टोपनो, संगीता बारी, अनिल उरांव समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।




