लिखित समझौता लागू कराने की मांग पर सारंडा में आंदोलन, रांजाबुरु खदान में चक्का जाम
लिखित समझौता लागू कराने की मांग पर सारंडा में आंदोलन, रांजाबुरु खदान में ग्रामीणों ने किया चक्का जाम

गुवा संवाददाता। स्थानीय रोजगार और पूर्व में हुए लिखित समझौते को जमीन पर लागू कराने की मांग को लेकर सारंडा क्षेत्र में ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं का आंदोलन तेज हो गया है। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले सोमवार से सेल की गुवा खदान के रांजाबुरु क्षेत्र में अनिश्चितकालीन आंदोलन सह चक्का जाम शुरू किया गया।

आंदोलन का नेतृत्व मानकी लागुड़ा देवगम और गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल कर रहे हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और बेरोजगार युवा रांजाबुरु खदान पहुंचे। आंदोलनकारियों ने पारंपरिक हथियारों के साथ स्क्रीनिंग मशीन समेत खदान के विभिन्न संचालन क्षेत्रों को घेरकर चक्का जाम कर दिया। आंदोलन के कारण खदान में उत्पादन, लौह अयस्क डिस्पैच और माल ढुलाई की गतिविधियां प्रभावित होने की बात सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में सेल प्रबंधन, प्रशासन और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के दौरान स्थानीय रोजगार समेत कई मांगों पर लिखित सहमति बनी थी। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पहले दो बार आंदोलन और खदान बंदी के बाद यह समझौता हुआ था, लेकिन समझौते में तय बिंदुओं का अपेक्षित रूप से क्रियान्वयन नहीं किया गया।
मुखिया राजू सांडिल ने कहा कि ग्रामीणों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित समझौते का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना, 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना, रैक लोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना तथा प्रदूषण नियंत्रण के साथ कारो नदी की सुरक्षा शामिल है।
ग्रामीणों ने ठेका कंपनी मां सरला पर बाहरी लोगों को रोजगार देने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक लिखित समझौते के अनुसार मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक रांजाबुरु क्षेत्र में उत्पादन और ट्रांसपोर्टिंग बंद रखने का आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन में विभिन्न गांवों के मुंडा, ग्रामीण और बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा शामिल हैं।
फिलहाल आंदोलन के चलते खदान संचालन प्रभावित होने से स्थानीय स्तर पर स्थिति पर नजर बनी हुई है।




