मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जल्द हटाए जाएंगे : अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू

जमशेदपुर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर देश में राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने दावा किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को जल्द ही उनके पद से हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार जितनी देरी कर रही है, देशभर में सरकार के खिलाफ जनाक्रोश उतना ही बढ़ता जा रहा है।
सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कथित कृत्यों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सवाल उठ चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों के करीब 300 सांसदों के साथ सेवानिवृत्त न्यायाधीश, ब्यूरोक्रेट्स, फिल्मी दुनिया से जुड़ी हस्तियां और जेन-जी के लोग भी आंदोलन के समर्थन में सड़क पर उतर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर देशभर में बड़े जनआंदोलन की तैयारी की जा रही है। उनके अनुसार यदि केंद्र सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया तो आने वाले समय में सरकार के सामने गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है और इसका असर केंद्र की सत्ता पर भी पड़ सकता है।
अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने आरोप लगाया कि भाजपा को सत्ता में लाने के उद्देश्य से मुख्य चुनाव आयुक्त ने देश में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम कथित तौर पर अपनी मर्जी से मतदाता सूची से हटाए, जो उनके अनुसार पूरी तरह गैरकानूनी था। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि पद से हटने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कथित अनियमितताओं के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। सुधीर कुमार पप्पू ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के परिवार को पहुंचाए गए कथित लाभों की सत्ता परिवर्तन के बाद जांच कराई जाएगी।
सुधीर कुमार पप्पू ने आगे कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में देशभर में भाजपा और आरएसएस के प्रभाव में कमी आ सकती है। उन्होंने दावा किया कि लोगों ने आरएसएस की शाखाओं में जाना भी कम कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन होने की स्थिति में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए इन आरोपों और दावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। इन्हें अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।




