सिदगोड़ा सूर्य मंदिर में 2 से 4 सितंबर तक होगा तीन दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
बाल राधा-कृष्ण सजाओ प्रतियोगिता रहेगी विशेष आकर्षण, विजेता बच्चों को मिलेगा पुरस्कार व नगद राशि

जमशेदपुर। सिदगोड़ा स्थित सूर्य मंदिर परिसर में इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। सूर्य मंदिर कमिटी की ओर से आगामी 2, 3 और 4 सितंबर को तीन दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। महोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में सजावट एवं अन्य तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्साह का माहौल है।
महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें बाल राधा-कृष्ण सजाओ प्रतियोगिता बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। प्रतियोगिता में छोटे बच्चे राधा और कृष्ण के स्वरूप में सजकर हिस्सा लेंगे। आयोजन के माध्यम से बच्चों में भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके आदर्शों के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के लिए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार की व्यवस्था की गई है। विजेता बच्चों को पुरस्कार के साथ नगद राशि देकर सम्मानित किया जाएगा। प्रतियोगिता को लेकर बच्चों के साथ उनके अभिभावकों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है।
मंदिर कमिटी के सदस्यों ने बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को धार्मिक आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जाएंगी। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
कमिटी के अनुसार, महोत्सव में पूर्वी विधानसभा की विधायक पूर्णिमा दास साहू सहित कई गणमान्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना है। वहीं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के भी कार्यक्रम में शामिल होने की बात कही गई है। अतिथियों की मौजूदगी में विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं कार्यक्रमों के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
सूर्य मंदिर कमिटी ने शहरवासियों एवं श्रद्धालुओं से तीन दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। कमिटी का कहना है कि यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी देगा।




