जर्जर सड़क और लकड़ी के पुल के सहारे आवागमन, जान जोखिम में डाल रहे डुमरिया के ग्रामीण

डुमरिया: पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत कांटाशोल पंचायत के दर्जनों गांवों के ग्रामीण आज भी बुनियादी सड़क और पुल की सुविधा से वंचित हैं। बेनागाड़िया चौक से सातबाखरा, पितामुहली, दिघी, लुकापानी, मादकोचा, बाचकोमडुनगरी, रूहीनडी, जेडेरघुटू और गाडियांटांडी को जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों के लिए रोजाना इस रास्ते से आवागमन करना मुश्किल बना हुआ है।

इस मार्ग में दो नदियां पड़ती हैं। बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने के बाद आवागमन कई बार पूरी तरह बाधित हो जाता है। मजबूरी में ग्रामीणों ने नदी पार करने के लिए लकड़ी का अस्थायी पुल बनाया है और इसी के सहारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार प्रशासन, प्रखंड कार्यालय और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि समस्या को लेकर गंभीर पहल नहीं की गई।
मरीजों और गर्भवती महिलाओं की बढ़ी परेशानी
जर्जर सड़क का सबसे अधिक असर मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खटिया पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। आपात स्थिति में यह परेशानी बेहद गंभीर हो सकती है।
अस्पताल, अंचल कार्यालय, बैंक और बाजार सहित जरूरी कामों के लिए ग्रामीणों को इसी मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है।
पहाड़ी रास्तों से स्कूल जाते हैं बच्चे
सड़क की बदहाली से स्कूली बच्चे भी प्रभावित हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, कई बच्चे करीब दो किलोमीटर तक पहाड़ी और दुर्गम रास्तों से होकर स्कूल पहुंचते हैं। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने और रास्ता खराब होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द सड़क निर्माण कराने तथा दोनों नदियों पर स्थायी पुल बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क और पुल केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षित जीवन से जुड़ी बुनियादी जरूरत हैं। अब ग्रामीणों को प्रशासन की ठोस पहल का इंतजार है।




