कोल्हान

डीसी ऑफिस परिसर में वीर शहीद पोटो हो की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग, सामाजिक संगठनों ने सौंपा ज्ञापन

चाईबासा। कोल्हान के सेरेंगसिया कोल विद्रोह के महान योद्धा वीर शहीद सरदार पोटो हो के बलिदान को सम्मान देने की पहल शुरू हो गई है। चाईबासा में विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों ने जिला समाहरणालय परिसर में वीर शहीद पोटो हो की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग उठाई है।

इसी मांग को लेकर रविवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री सह चाईबासा विधायक दीपक बिरुवा, सिंहभूम सांसद जोबा मांझी समेत जिले के सभी विधायकों और राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों से मुलाकात की।

आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष इपिल सामड ने कहा कि वीर शहीद पोटो हो ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। समाहरणालय परिसर में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित होने से कोल्हान के इतिहास और उनके संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थापना केवल स्मारक निर्माण नहीं, बल्कि कोल्हान के वीर योद्धाओं के संघर्ष और बलिदान को सम्मान देने की पहल है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों और प्रशासन से सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा है।

दीपक बिरुवा ने दिया सहयोग का भरोसा

कैबिनेट मंत्री सह चाईबासा विधायक दीपक बिरुवा ने मांग का स्वागत करते हुए कहा कि कोल्हान की माटी के सपूत वीर शहीद पोटो हो की प्रतिमा स्थापित करने की पहल सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इस कार्य में जो भी उचित और संभव सहयोग होगा, वह स्वयं तथा जिले के सभी विधायक और सांसद मिलकर करेंगे।

प्रतिनिधिमंडल ने सांसद जोबा मांझी, चक्रधरपुर विधायक सुखराम उरांव, खरसावां विधायक दशरथ गागराई, मझगांव विधायक निरल पूर्ति, जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकू और मनोहरपुर विधायक जगत मांझी को भी ज्ञापन सौंपा।

इसके अलावा झामुमो, भाजपा और कांग्रेस के जिलाध्यक्षों, उपायुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, सदर अंचल अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देकर प्रतिमा स्थापना की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया गया।

प्रतिनिधिमंडल में इपिल सामड, गब्बर सिंह हेंब्रम, रवि बिरुली, चैतन्य कुंकल, रमय पूर्ति, चंद्र मोहन बिरूवा, बोंज देवगम, रामेश्वर सवैया, रामसिंह होनहागा, गणेश पाट पिंगुवा, चंदन होनहागा, लालू कुजूर, पंकज खलखो, विष्णु मिंज, शेरसिंह बिरुवा, ओयवन हेंब्रम और सुरेंद्र पूर्ति समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी व सदस्य शामिल रहे।

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