चाईबासा के हो भाषा साहित्यकार दास राम बारदा को मिला पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा स्मृति साहित्य सम्मान-2026

चाईबासा। चाईबासा के प्रसिद्ध हो भाषा साहित्यकार दास राम बारदा को रांची में पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा स्मृति साहित्य सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया। रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के मुंडारी विभाग, मुंडारी साहित्य परिषद और टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने उन्हें प्रशस्ति-पत्र और मोमेंटो प्रदान किया।

दास राम बारदा को हो भाषा साहित्य, विशेष रूप से हो भाषा के व्याकरण के विकास और लेखन के क्षेत्र में लंबे समय से किए जा रहे महत्वपूर्ण योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया। उनके सम्मानित होने पर चाईबासा के साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
समारोह में मुंडारी, संताली, कुड़ुख और खड़िया भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को भी सम्मानित किया गया। टाटा स्टील फाउंडेशन के एक्सक्यूटिव ऑफिसर शिव शंकर कांडेयांग को भी सम्मान प्रदान किया गया।
मुख्य अतिथि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मातृभाषा हमारी मूल पहचान और धरोहर है। इसे साहित्य के माध्यम से संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और विकास में साहित्यकारों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। मातृभाषा में लेखन और साहित्य सृजन के जरिए नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ा जा सकता है।
सम्मान समारोह में विभिन्न जनजातीय भाषाओं के साहित्यकार, शिक्षाविद और साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। दास राम बारदा को मिला यह सम्मान हो भाषा साहित्य के क्षेत्र में उनके लंबे समय से किए जा रहे कार्यों की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।




