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कोल्हानझारखंड

Jadugoda : तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट में नियोजन विवाद गहराया, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के प्रतिनिधिमंडल ने यूसिल प्रबंधन से की मुलाकात

विस्थापितों और प्रभावितों के नियोजन को लेकर उठे सवाल, पांच ग्राम प्रधानों से सत्यापन की प्रक्रिया पर जताई आपत्ति

  • नियोजन और पुनर्वास के मुद्दे पर यूसिल से मांगी गई जवाबदेही
  • विधायक को क्वार्टर आवंटन के मुद्दे पर भी उठे सवाल
  • रोजगार और पुनर्वास को लेकर विस्थापितों की उम्मीदें बढ़ीं

जादूगोड़ा : यूसिल की तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट में विस्थापितों और प्रभावित परिवारों के नियोजन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पांच ग्राम प्रधानों से सत्यापन के बाद संवेदक के अधीन नियोजन की प्रक्रिया शुरू किए जाने के मुद्दे पर क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। इसी क्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को यूसिल के उपमहाप्रबंधक राकेश कुमार और प्रबंधक गिरीश गुप्ता से मुलाकात कर इस व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज कराई। प्रतिनिधिमंडल ने इसे विस्थापितों और प्रभावितों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कथित तौर पर लागू किए गए प्रावधान को वापस लेने की मांग की। साथ ही लंबित पुनर्वास, नियोजन और अन्य मुद्दों पर कंपनी अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई, ताकि प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार मिल सके।

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विस्थापितों के पुनर्वास और नियोजन को लेकर लगातार उठ रही है आवाज

बैठक के दौरान भाजपा नेता गणेश सरदार ने यूसिल प्रबंधन से कई तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि किस नियम और प्रावधान के तहत पोटका विधायक संजीव सरदार को तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट की आवासीय कॉलोनी में पांच क्वार्टर आवंटित किए गए हैं। उन्होंने मांग की कि यदि आवंटन नियमों के अनुरूप नहीं है तो उसे तत्काल निरस्त किया जाए। गणेश सरदार ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया तो भाजपा आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। बैठक में इस मुद्दे पर यूसिल प्रबंधन द्वारा कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दिए जाने से उपस्थित लोगों के बीच कई सवाल खड़े हुए। विस्थापितों और प्रभावितों ने आरोप लगाया कि विभिन्न मामलों में कंपनी का रवैया अलग-अलग दिखाई देता है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

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17 विस्थापितों के नियोजन और त्रिपक्षीय बैठक पर टिकी निगाहें

बैठक में भाजपा नेता गणेश सरदार ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले लगभग 15 वर्षों से तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट के 17 विस्थापितों और प्रभावितों को नियोजन से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि कंपनी शीघ्र नियोजन सुनिश्चित करे, अन्यथा व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी यूसिल प्रबंधन की होगी। प्रतिनिधिमंडल ने मृतक आश्रितों को नौकरी, विस्थापितों के पुनर्वास तथा लंबित नियोजन मामलों को प्राथमिकता से सुलझाने की मांग उठाई। बताया गया कि इन मुद्दों पर अगली त्रिपक्षीय बैठक जमशेदपुर के एसडीओ की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी, जिसमें पुनर्वास, रोजगार और अन्य लंबित विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। बैठक में राम साईं सोरेन, गणेश सरदार, विशाल चाकी, प्रिया कुकल सहित बड़ी संख्या में विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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