
धनबाद। पुलिसकर्मियों की समस्याओं, आम लोगों के साथ कथित उत्पीड़न और छात्रों के अधिकारों को लेकर विधायक ने सरकार पर जोरदार निशाना साधा है। विधायक ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी पुलिसकर्मी या पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि उस पूरी पुलिसिया व्यवस्था के खिलाफ है, जहां आम जनता के साथ-साथ निचले स्तर पर काम करने वाले पुलिसकर्मियों के शोषण की भी शिकायतें सामने आती रहती हैं।

विधायक ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने हमेशा पुलिसकर्मियों की समस्याओं को सदन में उठाने का प्रयास किया है। उन्होंने विधानसभा में प्रतिनियुक्त पुलिसकर्मियों को समय पर भोजन नहीं मिलने का मामला उठाया था। उनके अनुसार, इस मुद्दे को विधानसभा में उठाए जाने के बाद पुलिसकर्मियों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जाने लगा।
उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि उस समय पुलिस एसोसिएशन के किसी सदस्य ने इस समस्या को लेकर पहल नहीं की और न ही बाद में उन्हें धन्यवाद देना जरूरी समझा। विधायक ने कहा कि किसी व्यवस्था में सुधार के लिए आवाज उठाना उनका जनप्रतिनिधि के तौर पर दायित्व है और वे आगे भी आम लोगों तथा कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाते रहेंगे।
“मेरी लड़ाई किसी पुलिसकर्मी से व्यक्तिगत नहीं”
विधायक ने स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मियों को लेकर उनकी नाराजगी व्यक्तिगत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका विरोध उस सिस्टम से है, जहां कई बार आम नागरिकों को अपनी शिकायतों के लिए संघर्ष करना पड़ता है और निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को भी विभिन्न परिस्थितियों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बरवाअड्डा थाना से जुड़े एक मामले का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि उन्होंने एक गरीब दलित युवक के पक्ष में केवल इतना कहा था कि बिना वजह किसी व्यक्ति को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी जरूरतमंद या कमजोर व्यक्ति के साथ अन्याय न हो, यह सुनिश्चित करना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
कोयला माफियाओं और दबंगों को लेकर उठाए सवाल
विधायक ने अपने बयान में राजनीतिक संरक्षण और पुलिस व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कई नेताओं द्वारा कोयला माफियाओं और दबंगों को थाने से छुड़ाए जाने के मामलों की चर्चा होती रही है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे मामलों के दौरान पुलिस एसोसिएशन की भूमिका क्या रही और उस समय संगठन की ओर से आवाज क्यों नहीं उठाई गई।
हालांकि, विधायक द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने अपने बयान के माध्यम से पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और निष्पक्षता की आवश्यकता पर जोर दिया।
छात्रों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का दावा
विधायक ने कहा कि वर्तमान समय में पूरे झारखंड में उनकी पार्टी छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठा रही है। उन्होंने कहा कि वे भी छात्रों के साथ सड़क से लेकर विधानसभा तक मजबूती से खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक दबाव या किसी अन्य कारण से कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। उनके मुताबिक, युवाओं और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई केवल किसी एक संगठन या व्यक्ति की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह राज्य के भविष्य से जुड़ा विषय है।
“आंदोलन को कमजोर करने की साजिश हो रही है”
विधायक ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन को कमजोर करने के लिए सरकार और कथित घोटालेबाजों के सिंडिकेट की ओर से साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पूरे विवाद में उलझाकर नियुक्ति माफिया और सरकार अपने कथित कारनामों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार खुद का बचाव करने में लगी हुई है। विधायक ने दावा किया कि चाहे कितने भी दबाव बनाए जाएं, वे छात्रों और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना बंद नहीं करेंगे।
“न झुकूंगा, न रुकूंगा, न टूटूंगा”
अपने बयान के अंत में विधायक ने संघर्ष जारी रखने की बात कहते हुए कहा कि वे किसी दबाव के सामने झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जनता और छात्रों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका संघर्ष सड़क से सदन तक जारी रहेगा।
विधायक ने दृढ़ता के साथ कहा, “मैं ना झुकूँगा, ना रुकूँगा, ना टूटूँगा। ये मेरा वादा है आपसे, संघर्ष जारी रहेगा।”




