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कॉकरोच जनता पार्टी पर सियासी घमासान, बिहार से झारखंड तक छिड़ी नई राजनीतिक बहस

धनबाद: बिहार में उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की चर्चा अब झारखंड तक पहुंच गई है। राज्य के कई शहरों और चौक-चौराहों पर इस नए राजनीतिक मॉडल को लेकर बहस तेज हो गई है। बिहार में जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी का स्वागत करने के बयान के बाद इस विषय ने और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है।

झारखंड में भी हाल के दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में कार्यक्रम और नारेबाजी देखने को मिली। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन कार्यक्रमों में शामिल कई लोग कांग्रेस समर्थक रहे हैं। कार्यक्रमों के दौरान लगाए गए नारों को भी कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी कारण यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य में कांग्रेस इस नए राजनीतिक मॉडल के जरिए भाजपा के खिलाफ अपनी रणनीति को धार दे सकती है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पेपर लीक जैसे मुद्दों को राहुल गांधी लंबे समय से उठाते रहे हैं। इसलिए यदि छात्रों और युवाओं के आंदोलन को समर्थन मिल रहा है तो कांग्रेस भी इसे अपनी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा मानती है। राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा के विरोध को लेकर कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच समानता की चर्चा हो रही है।

इस बीच रांची में भाजपा ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। हरमू स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में 23 जुलाई को हुए हंगामे और झड़प के मामले में अरगोड़ा थाना में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। इन मामलों में कांग्रेस नेता अजय नाथ शाहदेव समेत 69 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने दोनों मामलों में जांच शुरू कर दी है।

उधर बिहार में बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे जनसुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि कॉकरोच जनता पार्टी बिहार में सक्रिय होती है तो उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को चुनौती देना चाहता है और जनता के मुद्दों पर संघर्ष करता है, उसके साथ जनसुराज खड़ा रहेगा। प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि जनता संगठित होकर सत्ता में बैठे बड़े से बड़े नेताओं को जवाबदेह बना सकती है।

झारखंड और बिहार की राजनीति में इस नए राजनीतिक विमर्श ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कॉकरोच मॉडल केवल एक आंदोलन बनकर रह जाता है या फिर दोनों राज्यों की चुनावी राजनीति में नई दिशा तय करता है।

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