
चाईबासा: गुरुद्वारा नानक दरबार में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पहले प्रकाश परब का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत श्री अखंड पाठ की संपूर्णता के साथ हुई। इसके बाद श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष गुरमुख सिंह खोखर ने साध संगत को गुरु परब की बधाई दी।
गुरु ग्रंथ साहिब के संकलन का बताया इतिहास
गुरमुख सिंह खोखर ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब (आदि ग्रंथ) के संकलन का कार्य पांचवें गुरु गुरु अर्जुन देव ने वर्ष 1601 में शुरू कराया था, जो वर्ष 1604 में पूरा हुआ।
उन्होंने बताया कि बाद में दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने गुरु तेग बहादुर की वाणी को इसमें शामिल कर इसके संस्करण को पूर्ण कराया। यह कार्य वर्ष 1706 में पंजाब के साबो तलवंडी स्थित दमदमा साहिब में भाई मनी सिंह के सहयोग से पूरा हुआ।
गुरमुख सिंह खोखर ने कहा कि वर्ष 1708 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में गुरु गोविंद सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु का दर्जा दिया और सिख संगत को गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु मानने का संदेश दिया।
कीर्तनी जत्थे ने बांधा समां
प्रकाश परब के अवसर पर जमशेदपुर से विशेष रूप से पहुंचे कीर्तनी जत्थे के भाई जसपाल सिंह छाबड़ा ने मधुर कीर्तन प्रस्तुत किया। उनके साथ रविन्द्र सिंह ने संगत दी, जबकि तबले पर जसपाल सिंह ने साथ दिया।
कीर्तन के माध्यम से साध संगत को गुरु चरणों से जोड़ा गया। इस दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पहले प्रकाश से जुड़े इतिहास और उसके धार्मिक महत्व की भी विस्तार से जानकारी दी गई।
सुख-शांति और समृद्धि के लिए हुई अरदास
गुरुद्वारा के ग्रंथी हरभजन सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष सभी के सुख, शांति और समृद्धि के लिए अरदास की। इसके बाद संगत के बीच कड़ाह प्रसाद वितरित किया गया और गुरु का लंगर वरताया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साध संगत ने शामिल होकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूरे गुरुद्वारा परिसर में धार्मिक एवं भक्तिमय वातावरण बना रहा।




