शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी पर हो समाज में नाराजगी, लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान की मांग

चाईबासा: चाईबासा में पदयात्रा के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी हो समाज में नाराजगी सामने आई है। आदिवासी हो समाज युवा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद बिरुवा ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।

यह मामला चाईबासा के टाटा बाईपास चौक से जुड़ा है, जहां 4 अगस्त को प्रस्तावित दिशुम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा के अनावरण का आदिवासी हो महासभा एवं मुंडा मां की संघ द्वारा विरोध किया जा रहा है। इसी क्रम में आयोजित धरना-प्रदर्शन और पदयात्रा में शामिल लोगों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया।
गोविंद बिरुवा ने कहा कि समाज के बुद्धिजीवी, मानकी-मुंडा, युवा, समाजसेवी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों और जनभावनाओं को प्रशासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पदयात्रा कर रहे थे। ऐसे में उन्हें रोकना और गिरफ्तार करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन पर भी इस प्रकार की कार्रवाई होगी तो इससे आम लोगों के बीच कई सवाल खड़े होंगे।
उन्होंने प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग की। उनका कहना था कि यदि प्रशासन इसी तत्परता के साथ चोरी, डकैती, हत्या और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ भी त्वरित कार्रवाई करे तो आम जनता का कानून-व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत होगा।
गोविंद बिरुवा ने स्पष्ट किया कि समाज का आंदोलन किसी व्यक्ति या महापुरुष के विरोध में नहीं है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल जनभावनाओं का सम्मान, आपसी संवाद, सर्वसम्मति और न्यायपूर्ण निर्णय की मांग करना है। उनका कहना था कि कोल्हान के महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थानीय महापुरुषों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को उचित सम्मान मिलना चाहिए तथा ऐसे निर्णय सभी पक्षों के बीच संवाद और सहमति के आधार पर लिए जाने चाहिए, ताकि सामाजिक सौहार्द और भाईचारा बना रहे।
अंत में उन्होंने समाज के लोगों से शांति, संयम और एकजुटता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि अपनी बात हमेशा संविधान और कानून के दायरे में रहकर रखें। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज सुनी जाएगी और इस मामले में निष्पक्ष निर्णय होगा।
(नोट: यह समाचार संबंधित पक्ष द्वारा जारी बयान और उनके दावों पर आधारित है। प्रशासन या अन्य संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)




