चाईबासा में भव्य रूप से मनेगा विश्व आदिवासी दिवस, 25 हजार से अधिक लोगों के जुटने की संभावना

चाईबासा: आदिवासी एकता, अखंडता, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का संदेश देने वाला विश्व आदिवासी दिवस समारोह 9 अगस्त को चाईबासा के सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। समारोह में 25 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन को लेकर विश्व आदिवासी दिवस आयोजन समिति द्वारा तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

आयोजन समिति के अध्यक्ष ईपील सामड ने बताया कि समारोह की तैयारी पिछले कई दिनों से चल रही है। कार्यक्रम स्थल पर आदिवासी समाज के पाहन और दिउरी द्वारा सुख, समृद्धि और शांति के लिए सामूहिक पूजा की जाएगी। समारोह में ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम समेत पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर, किरीबुरू, गुवा और अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे।
पारंपरिक परिधान में शामिल होंगे लोग
समारोह में हो, उरांव, संथाल, मुंडा, लोहरा, भूमिज, बिरहोर और मानकी-मुंडा सहित 40 से अधिक आदिवासी सामाजिक संगठनों के महिला-पुरुष, युवक-युवतियां, अभिभावक और बच्चे शामिल होंगे। लोग पारंपरिक आदिवासी परिधान में शामिल होकर अपनी संस्कृति और पहचान के संरक्षण का संदेश देंगे। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की जाएगी।
गीत-नृत्य और पारंपरिक व्यंजनों से सजेगा समारोह
कार्यक्रम स्थल पर जनजातीय कलाकारों का समागम होगा। पारंपरिक गीत, नृत्य और कला प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति की समृद्ध झलक देखने को मिलेगी। वहीं, आदिवासी पारंपरिक व्यंजन और परिधानों से जुड़े करीब 50 स्टॉल लगाए जाएंगे। आदिवासी परंपरा से संबंधित विशेष सेल्फी प्वाइंट भी बनाया जा रहा है।
पूरे चाईबासा शहर में सरना झंडे लगाए जाएंगे। कार्यक्रम स्थल के साथ-साथ तीनों मुख्य स्वागत द्वार पर सुझाव पेटी और दान पेटी की व्यवस्था रहेगी। समारोह का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा, जिससे दूर-दराज के लोग भी कार्यक्रम से जुड़ सकेंगे।
19 श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का होगा सम्मान
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को 19 अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। इनमें दिव्यांग प्रेरणा, महिला सशक्तीकरण, युवा नेतृत्व, शिक्षा, सामाजिक सेवा, भाषा-साहित्य, कृषि एवं प्राकृतिक खेती, पारंपरिक ज्ञान संरक्षण, प्रशासन एवं जनसेवा, कला-संस्कृति, खेल, पर्यावरण, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता एवं रोजगार सृजन, पत्रकारिता एवं जनसंचार, विज्ञान एवं नवाचार, जीवन गौरव, सामुदायिक नेतृत्व तथा सर्पदंश से बचाव जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया जाएगा संकल्प
समारोह के दौरान आदिवासी भाषा, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण, शिक्षा एवं युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने, जल-जंगल-जमीन की रक्षा तथा सामाजिक एकता, भाईचारा और समरसता बनाए रखने का संकल्प लिया जाएगा।
ईपील सामड ने कहा कि समारोह का उद्देश्य समाज के विकास, संरक्षण और जागरूकता के क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित करना है। साथ ही आदिवासी पहचान, संस्कृति और परंपरा को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास किया जा रहा है।




