Jamshedpur : मानगो नगर निगम की निविदा रद्द करने की कार्रवाई पर सरयू राय का सवाल, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
पीडब्ल्यूडी कोड के उल्लंघन का आरोप, विधानसभा में मुद्दा उठाने की घोषणा

जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मानगो नगर निगम द्वारा नगर निगम चुनाव से पहले प्रकाशित करीब डेढ़ दर्जन से अधिक निविदाओं को बिना स्पष्ट कारण बताए रद्द किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय लोक निर्माण संहिता (पीडब्ल्यूडी कोड) के प्रासंगिक प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होता है। राय ने कहा कि किसी भी सरकारी विभाग, नगर निकाय या सार्वजनिक संस्था में निविदा प्रक्रिया का संचालन निर्धारित नियमों के तहत किया जाता है और इन नियमों की अनदेखी प्रशासनिक पारदर्शिता तथा जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। विधायक का कहना है कि निविदा प्रक्रिया में नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की मनमानी स्वीकार नहीं की जा सकती।
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निविदा प्रक्रिया के लिए पीडब्ल्यूडी कोड को बताया सर्वोच्च मार्गदर्शक
सरयू राय ने अपने बयान में कहा कि पीडब्ल्यूडी कोड को निविदा निष्पादन के मामलों में सर्वोच्च मार्गदर्शक दस्तावेज माना जाता है। उन्होंने इसकी तुलना बाइबिल, गीता और कुरान जैसे मार्गदर्शक ग्रंथों से करते हुए कहा कि सभी विभागों और नगर निकायों को इसी के अनुरूप कार्य करना होता है। राय के अनुसार, किसी भी निविदा प्रक्रिया में सबसे कम दर यानी एल-1 निविदादाता का चयन किया जाता है और उसे लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (एलओए) जारी किया जाता है। इसके बाद उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर एकरारनामा करना होता है। यदि चयनित एजेंसी समय पर सहमति नहीं देती है, तब नियमों के अनुसार उसे रिमाइंडर भेजे जाते हैं और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
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एल-1 और एल-2 प्रक्रिया का पालन किए बिना निविदा रद्द करने पर सवाल
विधायक ने कहा कि पीडब्ल्यूडी कोड के अनुसार यदि एल-1 निविदादाता निर्धारित अवधि में एकरारनामा नहीं करता है तो उसकी अग्रिम धनराशि जब्त कर एल-2 निविदादाता के साथ दर वार्ता की जाती है। यदि एल-2 समान दर पर कार्य करने को तैयार हो तो उसे कार्य सौंपा जाता है, अन्यथा निविदा रद्द करने की प्रक्रिया शुरू होती है। सरयू राय का आरोप है कि मानगो नगर निगम ने निविदाएं रद्द करने के दौरान इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में बिना निर्धारित नियमों का अनुपालन किए सीधे निविदा रद्द कर दी गई। इससे निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल ठेकेदारों का भरोसा प्रभावित होता है बल्कि सार्वजनिक परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन पर भी असर पड़ता है।
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एकरारनामा और अग्रधन जमा करने वाले निविदादाताओं की निविदाएं भी हुईं रद्द
सरयू राय ने दावा किया कि कुछ ऐसे निविदादाताओं की निविदाएं भी रद्द कर दी गई हैं जिन्होंने एकरारनामा कर लिया था और अग्रधन राशि भी जमा कर दी थी। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी भी सामने आ रही है कि जिन कार्यों की तकनीकी अथवा प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही थी, उन्हें भी रद्द करने या रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है। उनके अनुसार यह स्थिति और अधिक गंभीर है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि स्थापित प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया है। राय ने कहा कि यदि कोई अधिकारी बिना पर्याप्त कारण और नियमों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाए ऐसे फैसले लेता है तो उसकी कार्यकुशलता और प्रशासनिक निपुणता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता बताई।
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विधानसभा में उठेगा मुद्दा, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
सरयू राय ने कहा कि किसी भी वरिष्ठ लोकसेवक द्वारा इस प्रकार का निर्णय लेना आश्चर्यजनक है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसा निर्णय या तो किसी निहित स्वार्थ के कारण लिया गया होगा अथवा संबंधित अधिकारी किसी दबाव में कार्य कर रहे होंगे। दोनों ही परिस्थितियां प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक हैं। विधायक ने कहा कि निविदा प्रक्रिया में पीडब्ल्यूडी कोड के प्रावधानों की अनदेखी या उल्लंघन को गंभीर अपराध की श्रेणी में माना जाता है और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि वह इस पूरे मामले को विधानसभा के आगामी सत्र में प्रमुखता से उठाएंगे और सरकार से मांग करेंगे कि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन और विकास योजनाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।




