शिबू सोरेन की प्रतिमा विवाद पर साधु बानरा की प्रतिक्रिया, बोले- पहले कोल्हान के वीर सपूतों को मिले प्राथमिकता

चाईबासा: कोल्हान में दिशोम गुरु पद्मभूषण शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच सामाजिक कार्यकर्ता साधु बानरा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कोल्हान का गौरवशाली इतिहास वीरता, संघर्ष और बलिदान से भरा हुआ है, इसलिए सबसे पहले क्षेत्र के वीर सपूतों और ऐतिहासिक महापुरुषों को सम्मान मिलना चाहिए।

साधु बानरा ने कहा कि हो समुदाय ने सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। कोल विद्रोह और सेरेंगसिया जैसी ऐतिहासिक लड़ाइयों में अनेक वीर योद्धाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी कोल्हान की अपनी अलग पहचान रही है। उनके अनुसार, कोल्हान के भीष्म पितामह कहे जाने वाले बागुन सुम्ब्रुई समेत क्षेत्र की महान विभूतियों की प्रतिमाएं स्थापित कर समाज को प्रेरणा दी जा सकती है।
साधु बानरा ने स्पष्ट किया कि किसी भी महान व्यक्तित्व की प्रतिमा स्थापित करने की पहल स्वागत योग्य है, लेकिन ऐसे निर्णय से पहले राजनीतिक दलों को समाज के विभिन्न वर्गों से व्यापक संवाद करना चाहिए था। उनका मानना है कि संवाद की कमी के कारण ही इस मुद्दे पर कुछ लोगों की ओर से विरोध सामने आया है।
उन्होंने सुझाव दिया कि चाईबासा, चक्रधरपुर, जगन्नाथपुर सहित कोल्हान के सभी प्रमुख शहरों और चौक-चौराहों पर सबसे पहले क्षेत्र के वीर शहीदों, महापुरुषों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दी जाए। इससे नई पीढ़ी को कोल्हान के समृद्ध इतिहास, संस्कृति और विरासत से परिचित कराने में मदद मिलेगी।




