
- डीसी और वन विभाग को भेजी शिकायत, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
- प्रधानाध्यापक ने दी सफाई, सुरक्षा कारणों से उठाया गया कदम
- विद्यालय प्रबंधन ने सुरक्षा और रखरखाव को बताया निर्णय का आधार
बहरागोड़ा : मानुषमुड़िया प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों की कटाई और एक पुरानी सरकारी इमारत को ढहाए जाने के मामले ने क्षेत्र में विवाद खड़ा कर दिया है। घटना की जानकारी मिलते ही मानुषमुड़िया पंचायत के मुखिया राम मुर्मू विद्यालय पहुंचे और पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय परिसर के भीतर स्थित पुराने एवं घने पेड़ों को बिना किसी पूर्व सूचना, सक्षम विभाग की अनुमति या स्थानीय प्रशासन को अवगत कराए काट दिया गया। साथ ही विद्यालय की बाउंड्री के अंदर स्थित एक पुरानी सरकारी इमारत को भी बिना किसी स्पष्ट विभागीय आदेश के ध्वस्त कर दिया गया। मुखिया ने कहा कि विद्यालय परिसर में मौजूद पेड़ केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं थे, बल्कि विद्यार्थियों को छाया और स्वच्छ वातावरण भी प्रदान करते थे। ऐसे पेड़ों की कटाई से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होगा और छात्रों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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पर्यावरण संरक्षण को लेकर मुखिया ने उठाए गंभीर सवाल
मुखिया राम मुर्मू ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जिले के उपायुक्त और वन विभाग के अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय परिसर के पेड़ वर्षों से बच्चों को गर्मी और धूप से राहत देते थे तथा परिसर की सुंदरता बढ़ाते थे। लोगों का आरोप है कि यदि पेड़ों की स्थिति खराब थी तो पहले संबंधित विभाग से अनुमति लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए थी। वहीं पुरानी सरकारी इमारत को अचानक गिराए जाने को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
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ग्रामीणों और अभिभावकों ने पारदर्शी जांच की उठाई मांग
दूसरी ओर, विद्यालय के प्रधानाध्यापक छोटा भुजंग टुडू ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिस पेड़ को काटा गया, वह पूरी तरह सूख चुका था और कभी भी गिरकर किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था। उन्होंने बताया कि पेड़ से लगातार पत्तियां और गंदगी विद्यालय की नई इमारत की छत पर गिरती थीं, जिससे भवन को नुकसान पहुंच रहा था और नियमित सफाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। प्रधानाध्यापक के अनुसार विद्यार्थियों और विद्यालय की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। हालांकि, पेड़ कटाई और भवन ध्वस्तीकरण को लेकर उठे सवालों के बीच अब मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।




