
- शहीदों के सपनों का समाज बनाने का लिया गया संकल्प
बहरागोड़ा : बहरागोड़ा स्थित सिद्धू-कान्हू-बिरसा जाहेर गाड़ परिसर में मंगलवार को हूल महा दिवस श्रद्धा, सम्मान और पारंपरिक भव्यता के साथ मनाया गया। सिद्धू-कान्हू-बिरसा समिति के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में संथाल हूल आंदोलन के अमर नायकों सिद्धू, कान्हू, चांद, भैरव तथा वीरांगना फूलो-झानो को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य पुजारी दुर्गा हेंब्रम द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद समिति के अध्यक्ष कृष्ण मुंडा के नेतृत्व में उपस्थित लोगों ने शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उनके अदम्य साहस, संघर्ष और बलिदान को नमन किया। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और समाज के लोगों ने भाग लेकर हूल आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को याद किया।
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युवाओं को हूल आंदोलन के आदर्शों पर चलने का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समिति अध्यक्ष कृष्ण मुंडा ने कहा कि 30 जून 1855 को शुरू हुआ हूल केवल एक विद्रोह नहीं था, बल्कि अपनी माटी, संस्कृति, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लड़ा गया एक ऐतिहासिक महासंग्राम था। उन्होंने युवाओं से शहीदों के आदर्शों को अपनाने और समाज को नई दिशा देने का आह्वान किया। इस अवसर पर स्वपन महतो, शिवन मुंडा, जयपाल मुंडा, प्रभाष बास्के, फागू टुडू, पूर्ण चंद्र मुर्मू, अजीत बैठा, धनंजय बेसरा और यदुनाथ टुडू सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर शहीदों के सपनों का समाज बनाने और अपनी संस्कृति व अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।




