
चाईबासा।प्रकाश गुप्ता:पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता आयोग ने सहारा समूह से जुड़ी हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड को उपभोक्ता के प्रति सेवा में कमी और लापरवाही का दोषी मानते हुए मृत महिला की जमा राशि के भुगतान का आदेश दिया है। आयोग ने शिकायतकर्ता कृष्णा चटर्जी के पक्ष में मूलधन, बकाया ब्याज, मानसिक प्रताड़ना एवं सेवा में कमी की क्षतिपूर्ति और मुकदमा खर्च सहित कुल 5,85,425 रुपये का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है।
मामला चाईबासा के गुटुसाई मोहल्ला निवासी कृष्णा चटर्जी, पुत्री पुरुषोत्तम चटर्जी से जुड़ा है। कृष्णा चटर्जी ने हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के खिलाफ C.C. केस नंबर 36/2025 दायर किया था। मामले की शुरुआत 23 सितंबर 2025 को हुई थी, जबकि अंतिम सुनवाई 5 अगस्त 2026 को हुई और आयोग ने 13 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाया।
शिकायत के अनुसार, कृष्णा चटर्जी की मां स्वर्गीय पुतुल चटर्जी ने 28 जून 2019 को कंपनी की योजना में 3,63,000 रुपये जमा किए थे। बॉन्ड की परिपक्वता अवधि 28 जून 2024 निर्धारित थी और कृष्णा चटर्जी को नामिनी बनाया गया था। हालांकि, परिपक्वता अवधि से पहले ही 12 फरवरी 2024 को पुतुल चटर्जी का निधन हो गया। इसके बाद नामिनी होने के बावजूद कृष्णा चटर्जी को जमा राशि और देय ब्याज का भुगतान नहीं किया गया।
रिकॉर्ड के मुताबिक, कंपनी की ओर से केवल तीन बार 3,328 रुपये की मासिक ब्याज राशि का भुगतान किया गया। इसके बाद भुगतान बंद हो गया। परिजनों ने कंपनी को पत्र भेजकर जमा राशि और ब्याज के भुगतान की मांग की, लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
कंपनी के उपस्थित नहीं होने पर एकतरफा सुनवाई
आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, 21 अक्टूबर 2025 को नोटिस प्राप्त होने के बावजूद कंपनी की ओर से सुनवाई में कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। लगातार अवसर दिए जाने के बाद भी कंपनी की ओर से कोई पक्ष नहीं रखा गया। इसके बाद 21 जनवरी 2026 को आयोग ने मामले की सुनवाई एकतरफा यानी एक्स-पार्टी करने का आदेश दिया।
आयोग ने बॉन्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र, कंपनी को भेजे गए पत्र, बैंक पासबुक, अन्य दस्तावेजों और शिकायतकर्ता के शपथपत्र का परीक्षण किया। दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने माना कि कंपनी ने निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज और परिपक्वता राशि का भुगतान नहीं कर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार किया।
57 माह के ब्याज के रूप में 1.72 लाख रुपये
आयोग ने 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 57 माह के बकाया ब्याज की गणना 1,72,425 रुपये की। इसके अलावा सेवा में कमी और मानसिक प्रताड़ना के लिए 40,000 रुपये तथा मुकदमा खर्च के रूप में 10,000 रुपये देने का आदेश दिया गया।
इस प्रकार शिकायतकर्ता को कुल 5,85,425 रुपये का भुगतान करना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित 45 दिनों की अवधि में भुगतान नहीं करने पर मूलधन एवं ब्याज की राशि पर फैसला सुनाए जाने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
आदेश की मुख्य बातें
जमा राशि: 3,63,000 रुपये
57 माह का बकाया ब्याज: 1,72,425 रुपये
सेवा में कमी एवं मानसिक प्रताड़ना की क्षतिपूर्ति: 40,000 रुपये
मुकदमा खर्च: 10,000 रुपये
कुल भुगतान: 5,85,425 रुपये
भुगतान की समय-सीमा: 45 दिन
देरी होने पर ब्याज: 9 प्रतिशत वार्षिक
आयोग ने कहा कि सदस्य से राशि स्वीकार करने के बाद निर्धारित समय पर ब्याज और मूलधन वापस नहीं करना उपभोक्ता के प्रति सेवा में गंभीर कमी है। सहकारी समिति के लिए अपने सदस्यों के हितों के प्रति पारदर्शिता, सद्भावना और जवाबदेही के साथ कार्य करना आवश्यक है। आयोग के इस आदेश से जमा राशि के भुगतान को लेकर शिकायतकर्ता को बड़ी राहत मिली है।




