हाटगम्हरिया में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, बाल विवाह व डायन प्रथा के खिलाफ ग्रामीणों को किया गया जागरूक

चाईबासा: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा के तत्वावधान में चल रहे 90 दिवसीय विशेष कानूनी जागरूकता अभियान के तहत हाटगम्हरिया प्रखंड के सिंदरीगरी स्थित सामुदायिक संचालित प्रशिक्षण केंद्र में एक दिवसीय विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए अध्यक्ष मौहम्मद शाकिर तथा डीएलएसए सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। शिविर में एलएडीसी (LADC) के उप प्रमुख सुरेन्द्र दास ने ग्रामीणों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) की विभिन्न योजनाओं और निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समाज के कमजोर एवं वंचित वर्ग के लोग जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क कर बिना किसी शुल्क के कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम आयु में विवाह करना या कराना कानूनन दंडनीय अपराध है।
शिविर के दौरान ग्रामीणों को डायन प्रथा एवं अंधविश्वास के दुष्परिणामों से भी अवगत कराया गया। सुरेन्द्र दास ने कहा कि किसी महिला या व्यक्ति को डायन बताकर प्रताड़ित करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कानून का सहयोग लेना चाहिए। उन्होंने लोगों से अंधविश्वास से दूर रहकर सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की अपील की।
शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और अपने कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा विभिन्न सामाजिक कानूनों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।




