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भारतीय क्रिकेट के शांत योद्धा अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा, मेलबर्न की कप्तानी हमेशा रहेगी यादगार

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद और शांत स्वभाव के बल्लेबाजों में शुमार अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। उनके संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे अध्याय का अंत हुआ है, जिसने मुश्किल परिस्थितियों में हमेशा टीम इंडिया का साथ निभाया। रहाणे ने कभी सुर्खियों में रहने की कोशिश नहीं की, लेकिन जब भी टीम संकट में पड़ी, उन्होंने अपने बल्ले और नेतृत्व से भारत को संभाला।

अजिंक्य रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 5,000 से अधिक रन बनाए, जिसमें 12 शतक और 26 अर्धशतक शामिल हैं। उनका बल्लेबाजी औसत भले ही महान खिलाड़ियों जैसा नहीं रहा, लेकिन उनके अधिकांश रन विदेशी धरती और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आए, जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बना दिया।

विदेशी दौरों पर रहाणे का प्रदर्शन हमेशा शानदार रहा। इंग्लैंड के लॉर्ड्स, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न, दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग, न्यूजीलैंड के वेलिंग्टन और वेस्टइंडीज के किंग्स्टन में खेली गई उनकी पारियां आज भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में बसी हुई हैं। तेज और उछालभरी पिचों पर उनकी तकनीक और धैर्य ने उन्हें दुनिया के बेहतरीन टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल किया।

अगर उनके करियर की सबसे यादगार पारी की बात करें तो वर्ष 2020 के मेलबर्न टेस्ट का शतक सबसे ऊपर आता है। एडिलेड टेस्ट में भारत के सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद पूरी दुनिया भारतीय टीम की आलोचना कर रही थी। विराट कोहली स्वदेश लौट चुके थे और कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल थे। ऐसे कठिन समय में कप्तान अजिंक्य रहाणे ने 112 रनों की शानदार पारी खेलकर न केवल भारत को जीत दिलाई, बल्कि पूरी टीम का आत्मविश्वास भी लौटाया। इसी जीत ने ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत की नींव रखी।

रहाणे की कप्तानी भी हमेशा याद रखी जाएगी। उन्होंने छह टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें चार मैच जीते और दो ड्रॉ रहे। उनकी कप्तानी में भारत को एक भी टेस्ट मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा। उनका शांत स्वभाव, सटीक निर्णय और युवा खिलाड़ियों पर भरोसा उनकी सबसे बड़ी ताकत रही।

रहाणे ने अपने पूरे करियर में कभी व्यक्तिगत उपलब्धियों को प्राथमिकता नहीं दी। वह हमेशा टीम की जरूरत के अनुसार खेले और हर चुनौती का डटकर सामना किया। शायद यही वजह है कि उन्हें भारतीय क्रिकेट का सबसे भरोसेमंद ‘टीम मैन’ कहा जाता है।

अजिंक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। मेलबर्न की वह कप्तानी, मुश्किल समय में दिखाई गई जिम्मेदारी और टीम के लिए समर्पण उन्हें भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में हमेशा शामिल रखेगा।

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