
चाईबासा: 174वीं वाहिनी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में सोमवार को 88वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बटालियन मुख्यालय स्थित शहीद स्मारक पर कमांडेंट मनोज डंग द्वारा पुष्प अर्पित कर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद उन्होंने क्वार्टर गार्ड पर सलामी ली और गार्ड का निरीक्षण किया।

स्थापना दिवस समारोह में कमांडेंट मनोज डंग ने अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों, जवानों तथा उनके परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए सीआरपीएफ के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की स्थापना 27 जुलाई 1939 को मध्य प्रदेश के नीमच में क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद 28 दिसंबर 1949 को संसद के अधिनियम के तहत इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि एक बटालियन से शुरू हुआ यह बल आज 247 से अधिक बटालियनों और लगभग 3.25 लाख जवानों के साथ देश का सबसे बड़ा अर्द्धसैनिक बल बन चुका है। पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ अभियान, उत्तर-पूर्व में उग्रवाद नियंत्रण, जम्मू-कश्मीर में शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में नक्सल विरोधी अभियानों में सीआरपीएफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
कमांडेंट ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, सांप्रदायिक तनाव, संसद पर हमले जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सीआरपीएफ ने अपने कर्तव्यों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के तहत हैती, कोसोवो और लाइबेरिया जैसे देशों में भी बल ने अपनी सेवाएं देकर भारत का सम्मान बढ़ाया है।
स्थापना दिवस के अवसर पर विशेष सैनिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। साथ ही विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ तथा बटालियन मुख्यालय और सभी समवायों में जवानों के लिए बड़ा खाना का भी आयोजन किया गया।
इस अवसर पर द्वितीय कमान अधिकारी जितेन्द्र कुमार, रजनीश कुमार, उप कमांडेंट धर्मेन्द्र नारायण सिंह, शांति किस्कू, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजयलक्ष्मी चौहान, चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप कुमार सी. सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, जवान एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।




