यूसीआईएल की वीआरएस योजना से वंचित 138 कर्मचारी पुत्रों के नियोजन मामले में 29 अक्टूबर को फैसला

जादूगोड़ा। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की वॉलंटियर रिटायरमेंट स्कीम (वीआरएस) से जुड़े 138 कर्मचारी पुत्रों के नियोजन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में धनबाद श्रम न्यायालय-01 में आगामी 29 अक्टूबर को फैसला सुनाया जाना है। फैसले को लेकर यूसीआईएल के भूतपूर्व कर्मचारियों के पुत्रों की निगाहें न्यायालय पर टिकी हुई हैं।
बताया गया कि वर्ष 2009 में तत्कालीन यूसीआईएल अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक रमेश गुप्ता के कार्यकाल में पिता के स्थान पर पुत्र के नियोजन से संबंधित वॉलंटियर रिटायरमेंट स्कीम लागू की गई थी। इस योजना को कर्मचारियों के पुत्रों के लिए रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण पहल माना गया।
हालांकि, करीब नौ वर्ष बाद अगस्त 2017 में कंपनी प्रबंधन ने योजना को बंद कर दिया। इसके चलते योजना के तहत नियोजन की प्रक्रिया में शामिल 138 कर्मचारी पुत्रों का मामला अटक गया और उन्हें कंपनी में रोजगार नहीं मिल सका।
मामले को लेकर झारखंड पीपुल्स पार्टी के संस्थापक सूर्य सिंह बेसरा और श्रवण कुमार ने कर्मचारी पुत्रों के अधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू की। पहले चाईबासा श्रम न्यायालय और बाद में धनबाद श्रम न्यायालय में मामला पहुंचा। अब इस मामले में 29 अक्टूबर को फैसला होना है।
यदि फैसला कर्मचारी पुत्रों के पक्ष में आता है, तो 138 यूसीआईएल कर्मचारी पुत्रों के नियोजन का रास्ता खुलने की संभावना है। ऐसे में संबंधित परिवारों की उम्मीदें अब धनबाद श्रम न्यायालय के आगामी फैसले पर टिकी हैं।




