
हाता: माताजी आश्रम, हाता में रविवार को झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद के तत्वावधान में दूसरे चरण की साहित्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में पहले चरण से चयनित 12 विद्यालयों एवं कॉलेजों के 60 विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी साहित्यिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को एक घंटे पूर्व विषय दिए गए। स्वरचित कविता के लिए “भारत माता”, कहानी के लिए शिक्षाप्रद कहानी तथा लेख के लिए “साहित्य समाज का दर्पण है” विषय निर्धारित किए गए। विद्यार्थियों ने निर्धारित समय में अपनी रचनात्मक क्षमता का परिचय दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एम्स के सेवानिवृत्त प्रेजिडेंट डॉ. जी.सी. माझी ने कहा कि हर बच्चे के भीतर प्रतिभा होती है, उसे आगे बढ़ाने के लिए केवल उचित मंच और प्रेरणा की आवश्यकता होती है। विशिष्ट अतिथि कनाई हांसदा ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। वहीं पूर्व सिविल सर्जन डॉ. अरविंद कुमार लाल ने कहा कि माताजी आश्रम और झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद क्षेत्र में सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्य कर रहे हैं।
परिषद के सचिव शंकर चंद्र गोप ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए परिषद के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। झारखंड प्रभा के संपादक सुनील कुमार दे ने कहा कि प्रतियोगिता का उद्देश्य छिपी हुई प्रतिभाओं की खोज कर उन्हें उचित मंच प्रदान करना है।
कार्यक्रम में जन्मेजय सरदार ने गाजूर संस्था की ओर से सभी प्रतिभागियों को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। अंत में परिषद के अध्यक्ष भवतारण मंडल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन सुनील कुमार दे ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक, परिषद के पदाधिकारी एवं स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।




