बागबेड़ा में बाढ़ के बाद बीमारी का खतरा, स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर दुखनी सोरेन ने उठाई आवाज

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के बागबेड़ा क्षेत्र में बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर चिंता बढ़ गई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में गंदगी, दूषित पानी और जलजमाव के कारण संक्रामक एवं जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है। इसे देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता दुखनी सोरेन ने सिविल सर्जन, पूर्वी सिंहभूम को पत्र सौंपकर प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अभियान चलाने की मांग की है।
पत्र में बताया गया कि नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बागबेड़ा की कई बस्तियों में बाढ़ का पानी घुस गया था, जिससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए। जिला प्रशासन की ओर से राहत शिविरों की व्यवस्था की गई थी। अब पानी धीरे-धीरे निकल रहा है, लेकिन कई गलियों, सड़कों, नालियों और घरों के आसपास गंदगी तथा दूषित पानी जमा है।
दुखनी सोरेन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ब्लिचिंग पाउडर का छिड़काव, विशेष मेडिकल कैंप और स्वास्थ्य जांच कराने की मांग की है। उन्होंने बुखार, डायरिया, उल्टी, त्वचा रोग सहित अन्य संक्रमणों की जांच, जरूरी दवाइयों और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही।
इसके साथ ही पेयजल स्रोतों एवं प्रभावित हैंडपंपों की जांच, आवश्यकतानुसार सैनिटाइजेशन और क्लोरीनेशन, मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए फॉगिंग व एंटी-लार्वा छिड़काव की मांग की गई है।
दुखनी सोरेन ने स्वास्थ्य विभाग की टीम से घर-घर स्वास्थ्य जांच और जागरूकता अभियान चलाने तथा राहत शिविरों में रह रहे लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराने का भी आग्रह किया। गंभीर मरीजों को तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद बीमारी फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य और स्वच्छता कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजकर दवाइयां, जांच और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करना जनहित में बेहद जरूरी है।




