बीमा दावा लटकाना पड़ा महंगा, उपभोक्ता आयोग ने विधवा के पक्ष में सुनाया बड़ा फैसला

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा दावा का समय पर निपटारा नहीं करने पर यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगाते हुए मृतक किसान की पत्नी के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को कुल 6.50 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें 5 लाख रुपये बीमा राशि, 1 लाख रुपये मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना का मुआवजा तथा 50 हजार रुपये वाद व्यय शामिल है।

मामला चक्रधरपुर प्रखंड के कोलचक्रा गांव निवासी दिवंगत रेंगो गगराई की पत्नी मादुई गगराई द्वारा दायर उपभोक्ता वाद से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार रेंगो गगराई ने ट्रैक्टर खरीदने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक की चाईबासा शाखा से ऋण लिया था। ऋण के साथ यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की लोन सिक्योर इंश्योरेंस पॉलिसी भी ली गई थी। 14 मार्च 2023 को कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
पति की मौत के बाद मादुई गगराई ने बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन लंबे समय तक उसका निपटारा नहीं किया गया। इस बीच बैंक की ओर से ऋण चुकाने का दबाव बनाए जाने पर उन्हें कर्ज लेकर 2 लाख रुपये जमा करने पड़े। इसके बावजूद न तो बीमा राशि मिली और न ही ऋण खाते का समुचित समाधान हुआ।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे, इसलिए भुगतान लंबित रहा। हालांकि आयोग ने पाया कि कंपनी दो वर्षों से अधिक समय तक दावा लंबित रखने का कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर सकी और न ही दावा स्वीकार या अस्वीकार करने का अंतिम निर्णय लिया। आयोग ने इसे उपभोक्ता के प्रति सेवा में स्पष्ट कमी माना।
आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह एवं महिला सदस्य देवश्री चौधरी की पीठ ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को 5 लाख रुपये बीमा राशि, 1 लाख रुपये मुआवजा तथा दोनों विपक्षी पक्ष संयुक्त रूप से 50 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करें। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा दावा के निपटारे में अनावश्यक विलंब के कारण शिकायतकर्ता को आर्थिक और मानसिक कष्ट झेलना पड़ा, इसलिए मुआवजा देना न्यायसंगत है।




