Welcome to Kolhan Samachar Live   Click to listen highlighted text! Welcome to Kolhan Samachar Live
कोल्हानझारखंड

Chaibasa : गुरुजी की प्रतिमा का विरोध झारखंड को बांटने की साजिश – सोनाराम देवगम

चाईबासा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर झामुमो जिला अध्यक्ष ने भाजपा समर्थित तत्वों पर साधा निशाना

चाईबासा : दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रस्तावित प्रतिमा स्थापना को लेकर जारी विवाद के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के पश्चिमी सिंहभूम जिला अध्यक्ष सोनाराम देवगम ने विरोध करने वालों पर तीखा हमला बोला है। चाईबासा स्थित दिशोम गुरु शिबू सोरेन चौक पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर प्रतिमा स्थापित की जा रही है, वहां के खप्परसाई, दुम्बीसाई, सिकुरसाई समेत संबंधित मौजा के ग्रामसभा सदस्यों और रैयतों को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। स्थानीय लोग इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन कुछ कथित भाजपा समर्थित लोग अनावश्यक रूप से इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी तत्व किसी के इशारे पर क्षेत्र का माहौल खराब करने और विवाद पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में स्वच्छता पखवाड़ा का शुभारंभ, छात्राओं ने निकाली जागरूकता रैली

सरदार पटेल की प्रतिमा स्थापना का उदाहरण देकर उठाए सवाल

सोनाराम देवगम ने कहा कि जो लोग आज ग्रामसभा और स्थानीय अधिकारों की बात कर रहे हैं, वे उस समय मौन थे जब चाईबासा के पुराने डीसी कार्यालय के सामने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा स्थापित की गई थी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय किसी सामाजिक संगठन या विरोधी समूह ने ग्रामसभा की राय या स्थानीय लोगों की सहमति का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने खरसावां गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस त्रासदी में हजारों आदिवासी-मूलवासी शहीद हुए थे और उस घटना के लिए तत्कालीन सत्ता को जिम्मेदार माना जाता है। इसके बावजूद आज विरोध करने वाले संगठन उस समय चुप रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग चुनिंदा मुद्दों को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : एक पौधा भविष्य के नाम अभियान के तहत दोमुहानी संगम घाट पर हुआ पौधारोपण

महापुरुषों को क्षेत्र और जाति के आधार पर बांटना गलत

झामुमो जिला अध्यक्ष ने कहा कि किसी एक महापुरुष का सम्मान करने के नाम पर दूसरे महापुरुष का अपमान करना उचित नहीं है। झारखंड के सभी शहीद, आंदोलनकारी, वीर सपूत और ऐतिहासिक व्यक्तित्व पूरे राज्य की साझा धरोहर हैं। चाहे वे कोल्हान क्षेत्र से हों, संथाल परगना, पलामू, रांची या जमशेदपुर से, सभी का योगदान झारखंड के निर्माण और पहचान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों को क्षेत्र, जाति, धर्म या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर बांटने का प्रयास समाज में विभाजन पैदा करता है। झारखंड की संस्कृति सदैव एकता, सम्मान और भाईचारे की रही है, जिसे कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

इसे भी पढ़ें : डुमरिया बाजार में बिजली के पोल पर लगे इलेक्ट्रिकल बॉक्स में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, समय रहते टला बड़ा हादसा

कोल्हान और संथाल परगना के बीच दरार डालने की कोशिश का आरोप

सोनाराम देवगम ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर कोल्हान और संथाल परगना के बीच विभाजन की राजनीति कर रहे हैं। उनका उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों के बीच अविश्वास पैदा करना है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रतिमा का मुद्दा नहीं है, बल्कि झारखंड की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है। यदि ऐसे प्रयासों को समय रहते नहीं रोका गया तो समाज में अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता राजनीतिक स्वार्थ के लिए फैलाए जा रहे भ्रम और विवाद को समझ रही है और ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने देगी।

इसे भी पढ़ें : मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण-2026: 5 अगस्त से 4 सितंबर तक जुड़वा सकते हैं नाम, डीसी ने युवाओं से की अपील

प्रतिमा स्थापना का निर्णय स्थानीय सहमति से हुआ : देवगम

देवगम ने स्पष्ट किया कि जिस चौक पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित की जा रही है, उस स्थान पर पहले किसी संगठन या व्यक्ति ने दावा नहीं किया था। यदि पहले से कोई विवाद या दावा सामने आता तो झामुमो किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन कर सकती थी। उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थापना का कार्य लगभग पूरा होने के बाद अचानक विरोध सामने आना इस बात का संकेत है कि कुछ लोग केवल विवाद खड़ा करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चाईबासा में तांबो चौक, गितिलपी चौक सहित कई ऐसे प्रमुख स्थान हैं, जहां कोल्हान के वीर सपूतों की प्रतिमाएं स्थापित की जा सकती हैं। अंत में उन्होंने झारखंड और विशेषकर कोल्हान की जनता से अपील की कि वे समाज को बांटने और आपसी वैमनस्य फैलाने वाले तत्वों से सतर्क रहें तथा राज्य की एकता, शहीदों के सम्मान और भाईचारे की परंपरा को मजबूत बनाए रखें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!