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कोल्हानझारखंड

Jadugoda : रंकिणी मंदिर विकास कार्य विवाद : विधायक संजीव सरदार के पुतला दहन की सरदार मुड़ा स्वशासन व्यवस्था ने की निंदा

सामाजिक कार्यकर्ता सिदेश्वर सरदार ने प्रेस वार्ता कर जताई चिंता, विकास कार्य को विवादित बनाने का लगाया आरोप

जादूगोड़ा : हाता–जादूगोड़ा मुख्य मार्ग स्थित ऐतिहासिक मां रंकिणी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास कार्य को लेकर चल रहा विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। विवाद के दूसरे दिन बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता सिदेश्वर सरदार एवं सरदार मुड़ा स्वशासन व्यवस्था ने मंदिर परिसर स्थित धूमकुड़िया भवन में प्रेस वार्ता आयोजित कर पोटका विधायक संजीव सरदार के पुतला दहन की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने घटना को निंदनीय बताते हुए कहा कि किसी भी विकासात्मक योजना को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के बजाय किसी जनप्रतिनिधि का पुतला दहन करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि रंकिणी थान भूमिज समाज की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है, जहां वर्षों से विभिन्न विकास कार्य होते रहे हैं और समाज ने हमेशा सकारात्मक सहयोग दिया है।

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19 करोड़ की योजना से बदली जा रही रंकिणी मंदिर क्षेत्र की तस्वीर

प्रेस वार्ता के दौरान सिदेश्वर सरदार ने कहा कि करीब दो वर्ष पूर्व विधायक संजीव सरदार के प्रयास से झारखंड सरकार के वन एवं पर्यटन विभाग द्वारा लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से रंकिणी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई थी। योजना के तहत फ्लाईओवर, गार्डवाल, सीढ़ियां, धूमकुड़िया भवन, विवाह मंडप सहित कई आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कार्य शुरू होने के बाद दो वर्षों तक किसी प्रकार का विरोध या विवाद सामने नहीं आया। अब अचानक कुछ लोगों द्वारा इसे विवादित बनाकर राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है, जो क्षेत्र के विकास के लिए उचित नहीं है।

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ग्रामसभा की सहमति और भूमि दान के बाद शुरू हुआ था विकास कार्य

सिदेश्वर सरदार ने ग्रामसभा की अनदेखी के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि 19 मई 2024 को बड़ा झरना हिल में ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में ग्रामसभा आयोजित हुई थी, जिसमें स्थानीय मुखिया और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया था। इसके अलावा 26 मई 2024 को रोहिणीबेड़ा मौजा में भी ग्रामसभा आयोजित की गई थी, जिसका उल्लेख ग्रामसभा पंजी में दर्ज है। उन्होंने बताया कि विकास कार्य के लिए स्थानीय रैयतों ने स्वेच्छा से अपनी भूमि दान की थी। कोंदा भूमिज और मोहन भूमिज सहित अन्य ग्रामीणों द्वारा भूमि उपलब्ध कराए जाने के बाद ही परियोजना को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि यह योजना स्थानीय लोगों की सहमति और सहभागिता से शुरू हुई थी, इसलिए इसे ग्रामसभा विरोधी बताना तथ्यों के विपरीत है।

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बाहरी तत्वों पर राजनीति करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग राजनीतिक उद्देश्य से इस विकास परियोजना को विवाद का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक संजीव सरदार की पहल से क्षेत्र में पर्यटन विकास की नई संभावनाएं खुली हैं, लेकिन विपक्ष से जुड़े कुछ लोग इसे बाधित करना चाहते हैं। सिदेश्वर सरदार ने कहा कि कुछ तत्व दो आदिवासी समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि क्षेत्र में वर्षों से आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द कायम है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज के लोग किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देंगे और विकास कार्यों का समर्थन जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को योजना पर आपत्ति है तो उसे संबंधित विभाग से जानकारी लेकर अपनी बात रखनी चाहिए, न कि जनभावनाओं को भड़काने का प्रयास करना चाहिए।

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माझी-परगना महाल, उपायुक्त और मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा प्रतिवेदन

सिदेश्वर सरदार ने बताया कि पूरे मामले को लेकर सरदार मुड़ा स्वशासन व्यवस्था का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही माझी-परगना महाल से मुलाकात करेगा और वास्तविक स्थिति से अवगत कराएगा। इसके बाद समाज की ओर से उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन में विकास कार्य के संबंध में तथ्यों को रखा जाएगा तथा समाज में भ्रम और वैमनस्य फैलाने की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रेस वार्ता के दौरान तरफ सरदार मुड़ा हिमांशु सरदार, हरिश चंद्र सिंह भूमिज, सुदर्शन भूमिज, गौरी सरदार, बासंती सरदार, हेमंत सरदार, मनोरंजन सिंह, निमाई सरदार, सूरज सरदार, लखीराम सरदार, वीर सिंह सरदार, शांखो सरदार, संजय सरदार, सागर सरदार, रामेश्वर सरदार, अमल सरदार, बिरेश सरदार, रविंद्र सरदार सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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