चाईबासा में स्वर्ण विकास योजना की परिपक्व राशि नहीं देने पर कंपनी को 9% ब्याज समेत भुगतान का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने वेलफेयर बिल्डिंग एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड को 1.50 लाख रुपये की बकाया राशि और ब्याज देने का दिया निर्देश, मानसिक परेशानी व मुकदमा खर्च के लिए भी 10 हजार रुपये देने होंगे

चाईबासा: स्वर्ण विकास योजना के तहत जमा राशि की निर्धारित परिपक्वता राशि का भुगतान नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पश्चिमी सिंहभूम ने वेलफेयर बिल्डिंग एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, विशाखापत्तनम के खिलाफ दायर शिकायत को स्वीकार करते हुए कंपनी को शिकायतकर्ता के पक्ष में 1.50 लाख रुपये की बकाया राशि का भुगतान 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह के आदेश के अनुसार ब्याज की गणना 29 जून 2015 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक की जाएगी। मामला सदर प्रखंड के रुइडीह, बारा चिरू निवासी बिरसिंह बांद्रा से संबंधित है, जिन्होंने कंपनी के एजेंट की सलाह पर स्वर्ण विकास योजना के चार बॉन्ड खरीदे थे। प्रत्येक बॉन्ड की राशि 50 हजार रुपये थी और बॉन्ड संख्या 181316, 181317, 181318 एवं 181319 के माध्यम से कुल दो लाख रुपये जमा किए गए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार 29 जून 2015 को निर्धारित परिपक्वता तिथि बीतने के बाद उन्होंने कंपनी से भुगतान की मांग की, लेकिन कई बार अनुरोध करने और कंपनी कार्यालय का चक्कर लगाने के बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। मामले में आयोग की ओर से कंपनी को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन कंपनी स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित नहीं हुई और न ही कोई जवाब दाखिल किया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। बिरसिंह बांद्रा ने चारों बॉन्ड और कंपनी को राशि जमा किए जाने से संबंधित दस्तावेज आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए, जिन पर कंपनी के निदेशक वित्त के हस्ताक्षर और कंपनी की मुहर अंकित थी। उपलब्ध दस्तावेजों और शपथपत्र के आधार पर आयोग ने शिकायतकर्ता के दावे को स्वीकार किया। आदेश में बताया गया कि समझौते की प्रक्रिया के दौरान कंपनी की ओर से 11 दिसंबर 2025 के 50-50 हजार रुपये के दो मांग ड्राफ्ट प्राप्त हुए थे, जिन्हें 6 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता को सौंप दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी 1.50 लाख रुपये की राशि बकाया रह गई। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को बकाया 1.50 लाख रुपये पर 29 जून 2015 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा शारीरिक एवं मानसिक परेशानी तथा मुकदमा खर्च के लिए 10 हजार रुपये अलग से देने का निर्देश दिया गया है। कंपनी को आदेश की सूचना मिलने के 45 दिनों के भीतर निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा। आदेश के अनुसार लंबित आवेदन, यदि कोई हो, का भी निस्तारण कर दिया गया है।




