बोलानी लौह अयस्क खदान में नए श्रमिक संगठन का गठन, 236 ठेका और 45 नियमित कर्मचारियों ने ली सदस्यता
श्रमिकों ने कथित शोषण, दुर्व्यवहार और सुविधाओं में कटौती की शिकायतें उठाईं; ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ की बोलानी इकाई के विस्तार की घोषणा।

चाईबासा: सेल की बोलानी लौह अयस्क खदान में श्रमिकों की समस्याओं, कथित शोषण और सुविधाओं में कटौती को लेकर असंतोष के बीच 26 सितंबर को ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ की बोलानी इकाई के गठन की घोषणा की गई। आमसभा में 236 ठेका श्रमिकों और 45 नियमित कर्मचारियों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की।
बताया गया कि स्थानीय श्रमिकों की ओर से लंबे समय से उनकी समस्याओं को लेकर श्रमिक संगठनों द्वारा अपेक्षित आवाज नहीं उठाए जाने की बात कही जा रही थी। इसी दौरान कुछ श्रमिकों ने झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे को बोलानी खदान में कथित शोषण और दुर्व्यवहार की जानकारी दी। इसके बाद रामा पांडे ने किरीबुरू के महामंत्री राजेंद्र सिंधिया को जिम्मेदारी दी।
श्रमिकों के अनुसार, ठेका श्रमिकों के साथ बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार, कुछ अधिकारियों पर श्रमिकों के साथ हाथापाई के आरोप तथा प्रशिक्षण में कार्यरत मजदूरों को मिलने वाली सुविधाएं बंद किए जाने जैसी समस्याएं सामने आईं। इन शिकायतों के बाद बोलानी में ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ के संगठनात्मक विस्तार का निर्णय लिया गया।
आमसभा में श्रमिकों को संगठन की कार्ययोजना की जानकारी दी गई। संगठन के संचालन के लिए समिति का गठन कर इसकी सूचना खदान प्रबंधन को देने की बात कही गई। संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी किरीबुरू के महामंत्री राजेंद्र सिंधिया, संयुक्त महामंत्री सुनील कुमार पासवान और मेघाहातुबुरु के उपमहामंत्री इंतखाब आलम को दी गई।
कार्यक्रम में रामा पांडे, गुवा के महामंत्री अंतर्यामी महाकुड, युवा नेता रोहित पांडे, चिड़िया के महामंत्री गंगा ठाकुर, उपाध्यक्ष राजीव सांडिल, राजीव कच्छप, मेघाहातुबुरु से इंतखाब आलम, जेएस गिल, दयानंद कुमार, आनंद हेसा पूर्ति, रोहित लोहार, एमडी जावेद, आफताब लाली, बासुदेव सहित पदाधिकारी मौजूद रहे। किरीबुरू से राजेंद्र सिंधिया, सुनील कुमार पासवान, एलएन राउत, प्रभा सिद्धू, लखन चाम्पिया, संजय तिग्गा, भीमसेन महानता, रंजीत मिस्टिकर, सुभाष दास और मधुसूदन नायक सहित सदस्य भी उपस्थित थे।
नए संगठन के गठन के बाद श्रमिकों में उत्साह देखा गया। पदाधिकारियों ने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं को संगठित तरीके से प्रबंधन के समक्ष रखा जाएगा और अधिकारों के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी।




