*पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को जीवन में अपनाने की जरूरत: बड़कुंवर गागराई*

चाईबासा: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर पूर्व मंत्री सह पूर्व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने उन्हें याद करते हुए उनके जीवन, कार्यों और विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके विचारों में समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और सम्मान पहुंचाने की सोच प्रमुख थी।
बड़कुंवर गागराई ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक प्रखर राष्ट्रचिंतक और कुशल संगठनकर्ता थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति और समाज की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए देश के विकास की दिशा पर विचार किया। उनका मानना था कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसी सोच को उन्होंने एकात्म मानववाद और अंत्योदय के विचार के माध्यम से आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपना जीवन व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं के बजाय संगठन और राष्ट्रहित के लिए लगाया। भारतीय जनसंघ को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच संगठन, अनुशासन और सेवा की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया। उनके विचार आज भी सामाजिक और राजनीतिक जीवन में चर्चा का विषय हैं।
देश की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए बड़कुंवर गागराई ने कहा कि आज देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और तकनीक, शिक्षा, रोजगार तथा विकास के क्षेत्र में नए अवसर सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी को समझना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि गरीब, वंचित और जरूरतमंद लोगों तक भी सुविधाएं पहुंचें।
उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपील करते हुए कहा कि युवा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और उनके संघर्षों से प्रेरणा लें। केवल उनके नाम या विचारों की चर्चा करने के बजाय उनके जीवन में सेवा, अनुशासन, सादगी और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जैसे गुणों को अपनाने का प्रयास करें।
बड़कुंवर गागराई ने भाजपा कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे संगठन को मजबूत करने के साथ समाज के जरूरतमंद लोगों के बीच जाकर काम करें। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता जनता की समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए प्रयास करें। यही पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को व्यवहार में आगे बढ़ाने का एक माध्यम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय को केवल जयंती के दिन याद करने के बजाय उनके विचारों को अपने व्यवहार और सामाजिक कार्यों में शामिल करने की जरूरत है। युवाओं और कार्यकर्ताओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और समाज के हित में आगे बढ़ना चाहिए।




