*वन ग्रामों में पेसा नियमावली के तहत ग्राम सभा गठन की मांग*

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी, गोईलकेरा, मनोहरपुर, बन्दगाँव, सोनुआ, नोवामुण्डी सहित विभिन्न प्रखंडों के सैकड़ों वन ग्रामों में ग्राम सभा का गठन नहीं होने से ग्रामीणों को सरकारी विकास योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जंगल और सुदूर क्षेत्रों में बसे इन गांवों में कई बुनियादी विकास योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित हो रहा है।
वन ग्रामों को विकास योजनाओं से जोड़ने और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए झारखण्ड आन्दोलनकारी मंच पश्चिमी सिंहभूम जिला कमिटी ने जिला प्रशासन से पेसा नियमावली 2025 के तहत ग्राम सभा गठन की मांग की है।
इसी मांग को लेकर शुक्रवार को झारखण्ड आन्दोलनकारी मंच पश्चिमी सिंहभूम जिला कमिटी के जिला संयोजक बिरसा मुंडा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उप विकास आयुक्त (डीडीसी) से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त मनीष कुमार के नाम मांगपत्र सौंपते हुए जिले के वन ग्रामों में ग्राम सभा का गठन कराने की मांग की।
मंच की ओर से कहा गया कि जिले के कई वन ग्राम जंगल और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। इन गांवों में रहने वाले ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच अपेक्षाकृत कम है। ग्राम सभा के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित होने के साथ विकास योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में भी सुविधा होगी।
प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से पेसा नियमावली 2025 के प्रावधानों के तहत वन ग्रामों में ग्राम सभा का गठन कराने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।
मंच ने कहा कि ग्राम सभा के गठन से वन ग्रामों के ग्रामीण अपनी स्थानीय जरूरतों और समस्याओं को प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रख सकेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की, ताकि जिले के सुदूर वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।




