
चाईबासा: यूपीआई भुगतान से जुड़ी शुल्क व्यवस्था को लेकर कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने गुरुवार को केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से संबंधित अपनी नीति और नियामकीय मंशा स्पष्ट करनी चाहिए। त्रिशानु राय के अनुसार, यूपीआई आज आम लोगों, छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
नई शुल्क व्यवस्था के प्रभाव को स्पष्ट करने की मांग
त्रिशानु राय ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल शुल्क व्यवस्था तय करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि किसी नई व्यवस्था का आर्थिक बोझ आम जनता और छोटे कारोबारियों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि यदि किसी नए शुल्क या एमडीआर का प्रावधान किया जाता है, तो उसके प्रभाव, पारदर्शिता और निगरानी की व्यवस्था भी स्पष्ट की जानी चाहिए।
डिजिटल भुगतान को अतिरिक्त लागत का माध्यम नहीं बनाने की अपील
कांग्रेस जिला प्रवक्ता ने कहा कि डिजिटल इंडिया का उद्देश्य लोगों के लिए भुगतान व्यवस्था को आसान और सुविधाजनक बनाना था। इसे अतिरिक्त लागत का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिजिटल भुगतान से जुड़ी किसी भी अतिरिक्त लागत का अनुचित बोझ व्यापारियों के माध्यम से ग्राहकों पर न पड़े।
छोटे कारोबारियों पर असर की जताई आशंका
त्रिशानु राय ने कहा कि बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और कारोबारी यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त लागत का असर उनके कारोबार पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी शुल्क व्यवस्था को लागू करने से पहले छोटे और मध्यम कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।
नीति और निगरानी में स्पष्ट जवाबदेही की मांग
उन्होंने कहा कि यूपीआई की विश्वसनीयता जनता के भरोसे पर बनी है। सरकार को नीति, नियमन और निगरानी के स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय करनी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें डिजिटल भुगतान की सुविधा बनी रहे और आम लोगों तथा छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़े।
केंद्र से स्थिति स्पष्ट करने की मांग
त्रिशानु राय ने केंद्र सरकार से यूपीआई से संबंधित शुल्क व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ऐसी नीतियां बनाई जानी चाहिए, जिनसे आम जनता को सुविधा मिले और छोटे कारोबारियों के हित भी सुरक्षित रहें।




