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Jamshedpurकोल्हान

Jamshedpur : संयुक्त जांच प्रतिवेदन में साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की स्वतंत्र वैधानिक स्थिति हुई स्पष्ट

निबंधन विभाग की संयुक्त जांच में साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को स्वतंत्र रूप से निबंधित संस्था माना गया

  • संपत्ति विवादों के लिए सिविल कोर्ट को बताया सक्षम मंच

जमशेदपुर : साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (निबंधन संख्या 33/2015-16) को लेकर दर्ज शिकायत पर निबंधन विभाग द्वारा कराई गई संयुक्त जांच का प्रतिवेदन सामने आने के बाद कमेटी की स्वतंत्र और पृथक वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो गई है। निबंधन कार्यालयों के निरीक्षक, कोल्हान प्रमंडल तथा सहायक निबंधन महानिरीक्षक द्वारा की गई संयुक्त जांच में संबंधित पक्षों को विधिवत नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना गया। जांच के दौरान लिखित और मौखिक साक्ष्यों के साथ उपलब्ध अभिलेखों का विस्तृत परीक्षण किया गया। 25 मार्च 2026 को आयोजित सुनवाई में दोनों पक्ष उपस्थित हुए और अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत किए। जांच अधिकारियों ने सभी तथ्यों और अभिलेखों की समीक्षा के बाद अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

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स्वतंत्र निबंधित संस्था के रूप में साकची कमेटी की स्थिति बरकरार

संयुक्त जांच प्रतिवेदन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, साकची एक स्वतंत्र रूप से निबंधित संस्था है। प्रतिवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि किसी अन्य स्वतंत्र संस्था के नियमों अथवा उपनियमों के आधार पर साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के स्वतंत्र निबंधन या उसके वैधानिक अस्तित्व को चुनौती नहीं दी जा सकती। जांच में यह भी सामने आया कि यदि किसी संस्था के संशोधित उपनियम निबंधन विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप दर्ज या अपलोड नहीं किए गए हैं, तो केवल उनके पारित होने या लागू किए जाने के दावे के आधार पर उन्हें वैधानिक रूप से मान्य नहीं माना जा सकता। इस आधार पर शिकायत में उठाए गए कई बिंदुओं को अपेक्षित कानूनी समर्थन नहीं मिलने की बात प्रतिवेदन में कही गई है।

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सीजीपीसी को भी वैधानिक प्रक्रिया का पालन करने की सलाह

प्रतिवेदन में सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (सीजीपीसी) से संबंधित पहलुओं पर भी स्पष्ट टिप्पणी की गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार यदि सीजीपीसी अपने पूर्व जनरल बोर्ड द्वारा पारित किसी नियम या संशोधन को प्रभावी रूप से अपने निबंधित उपनियमों का हिस्सा बनाना चाहती है, तो उसे निबंधन विभाग के समक्ष निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होगा। केवल किसी प्रस्ताव या संशोधन के पारित होने मात्र से उसे स्वतः विधिक मान्यता प्राप्त नहीं हो जाती। इसके लिए आवश्यक संशोधनों को नियमानुसार पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। प्रतिवेदन ने यह स्पष्ट किया कि किसी संस्था के अधिकारों और संरचना का निर्धारण वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप ही किया जा सकता है।

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संपत्ति और नियंत्रण संबंधी विवादों पर सिविल कोर्ट का होगा अंतिम निर्णय

जांच प्रतिवेदन में संपत्ति, नियंत्रण, प्रबंधन अथवा अन्य अधिकारों से जुड़े विवादों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे मामलों का अंतिम निर्णय निबंधन विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यदि किसी पक्ष के बीच संपत्ति, नियंत्रण या प्रबंधन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो उसका निपटारा सक्षम व्यवहार न्यायालय (सिविल कोर्ट) के माध्यम से ही होगा। न्यायालय साक्ष्यों और प्रासंगिक कानूनों के आधार पर अंतिम निर्णय देगा। इस प्रकार निबंधन विभाग की भूमिका केवल संस्था के निबंधन और उससे संबंधित वैधानिक प्रक्रियाओं तक सीमित मानी गई है।

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जांच प्रतिवेदन का स्वागत, वैधानिक आधार मजबूत होने का दावा

संयुक्त जांच प्रतिवेदन के सार्वजनिक होने के बाद साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने विभागीय निष्कर्षों का स्वागत किया है। कमेटी ने कहा कि उसका स्वतंत्र निबंधन और विधिक अस्तित्व किसी अन्य संस्था के एकतरफा निर्णय या दावे से प्रभावित नहीं हो सकता। कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने निबंधित संविधान, उपनियमों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप कार्य करती रहेगी। कमेटी के अनुसार जांच प्रतिवेदन ने उसकी स्वतंत्र वैधानिक स्थिति को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया है। हालांकि संपत्ति, प्रबंधन या अन्य अधिकारों से जुड़े किसी भी विवाद का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा। कमेटी ने भविष्य में भी सभी संस्थागत कार्यों में निर्धारित कानूनों और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

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