अर्थ एनक्लेव फ्लैट विवाद: बिल्डर के खिलाफ एफआईआर की मांग, फ्लैट मालिकों ने आरआईटी थाना में सौंपा संयुक्त आवेदन

आदित्यपुर/सरायकेला-खरसावां: अर्थ एनक्लेव अपार्टमेंट के फ्लैट स्वामियों और निवासियों ने बिल्डर और परियोजना से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ कथित धोखाधड़ी, वादाखिलाफी एवं निर्माण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आरआईटी थाना में संयुक्त आवेदन सौंपा है। आवेदन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

फ्लैट मालिकों ने अपने आवेदन में M/s Green Vatika Constructions Pvt. Ltd. के निदेशक अजय अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सोनम अग्रवाल, सुमिता अग्रवाल सहित गौरव अग्रवाल, रोशन सिंह, शीतल खुल्लर एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों को नामजद किया है। आरोप है कि आकर्षक वादों और आधुनिक सुविधाओं का भरोसा देकर फ्लैट बेचे गए, लेकिन वर्षों बाद भी परियोजना अधूरी है और कई बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।

आवेदन के अनुसार, फ्लैट खरीदते समय नियमित जलापूर्ति, निर्बाध बिजली, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, ड्रेनेज सिस्टम, विकसित कॉमन एरिया और बेहतर निर्माण गुणवत्ता का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, निवासियों का कहना है कि इनमें से कई सुविधाएं अब तक अधूरी हैं, जिससे उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
फ्लैट स्वामियों ने निर्माण गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अपार्टमेंट की दीवारों में दरारें, सीपेज, जल निकासी की समस्या, अधूरे कॉमन एरिया और अन्य तकनीकी खामियां मौजूद हैं। कई बार शिकायत करने और बिल्डर से संपर्क करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
निवासियों का कहना है कि परियोजना में बड़ी राशि निवेश करने के बावजूद उन्हें वादा के अनुरूप सुविधाएं नहीं मिलीं, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ रहा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
फ्लैट मालिकों ने उम्मीद जताई है कि पुलिस उनकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करेगी और फ्लैट खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्हें जल्द न्याय दिलाया जाएगा।
(नोट: यह समाचार फ्लैट स्वामियों द्वारा आरआईटी थाना में दिए गए संयुक्त आवेदन और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)




