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Jamshedpur : GSTAT की शुरुआत से भारत में अप्रत्यक्ष कर विवाद समाधान के नए युग का आगाज – सीआईआई झारखंड

जमशेदपुर में GST अपीलीय ट्रिब्यूनल की प्रक्रियाओं और डिजिटल फाइलिंग पर आयोजित हुआ विशेष सत्र

जमशेदपुर : भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) झारखंड ने 22 जुलाई 2026 को जमशेदपुर में “GSTAT इन प्रैक्टिस: अपील, प्रक्रियाएं और डिजिटल फाइलिंग” विषय पर एक महत्वपूर्ण सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, कर विशेषज्ञों, कानूनी सलाहकारों, वित्त पेशेवरों और व्यवसायिक अधिकारियों ने भाग लिया। सत्र का उद्देश्य नवगठित गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (GSTAT) की कार्यप्रणाली, अपील प्रक्रिया और डिजिटल फाइलिंग प्रणाली की जानकारी देना था। इस आयोजन में CII Jharkhand के साथ नॉलेज पार्टनर के रूप में Khaitan & Co जुड़ा। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने GST विवादों के समाधान के लिए स्थापित इस नई व्यवस्था को उद्योग जगत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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GSTAT से बढ़ेगी पारदर्शिता, कारोबारियों को मिलेगा समयबद्ध समाधान

सीआईआई झारखंड स्टेट काउंसिल के चेयरमैन और वीए मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक दिलीप पारिख ने कहा कि व्यवसायों में विश्वास बनाए रखने और भारत की आर्थिक विकास यात्रा को गति देने के लिए एक मजबूत एवं पूर्वानुमानित विवाद समाधान प्रणाली आवश्यक है। उन्होंने कहा कि GSTAT उद्योगों को कर विवादों के समाधान के लिए एक विशेष, पारदर्शी और समयबद्ध मंच उपलब्ध कराता है। वहीं सीआईआई झारखंड फाइनेंस एंड टैक्सेशन पैनल के कन्वेनर एवं टाटा स्टील के चीफ लीगल काउंसिल (इनडायरेक्ट टैक्सेशन) विकास मित्तल ने कहा कि GSTAT का गठन भारत के जीएसटी ढांचे में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे लंबित कर विवादों का तेजी से निपटारा होगा, मुकदमों की संख्या घटेगी और उद्योगों को अधिक निश्चितता प्राप्त होगी।

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रांची बेंच ने शुरू की सुनवाई, डिजिटल-फर्स्ट मॉडल पर जोर

GSTAT रांची बेंच के टेक्निकल मेंबर बिजोय बिहारी महापात्रा ने कहा कि ट्रिब्यूनल के संचालन से करदाताओं को विवादों के समाधान के लिए एक समर्पित मंच मिला है, जिससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि GSTAT पूरी तरह डिजिटल-फर्स्ट मॉडल पर आधारित है, जहां अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने लंबित अपीलों की फाइलिंग की समय-सीमा 31 जुलाई तक बढ़ाई है तथा 31 दिसंबर 2026 तक दस्तावेजों की जांच-पड़ताल में भी कुछ रियायतें दी गई हैं। वहीं GST अपीलीय ट्रिब्यूनल रांची बेंच के उपाध्यक्ष तुषार कांति सतपथी ने कहा कि दिल्ली की प्रधान पीठ के बाद रांची देश की पहली बेंच है, जहां सुनवाई शुरू हो चुकी है। उन्होंने उद्योग जगत से इस अवसर का लाभ उठाने और समय पर अपील दायर करने की अपील की।

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डिजिटल फाइलिंग, दस्तावेजीकरण और कानूनी रणनीति पर मिला मार्गदर्शन

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने डिजिटल फाइलिंग प्रणाली, दस्तावेजों की तैयारी और अपीलीय प्रक्रिया की तकनीकी बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की। सीआईआई झारखंड फाइनेंस एंड टैक्सेशन पैनल के को-कन्वेनर अरुण गौर ने कहा कि बदलते अपीलीय परिदृश्य में व्यवसायों को तकनीक आधारित अनुपालन प्रणाली अपनानी होगी। खैतान एंड कंपनी के इनडायरेक्ट टैक्स पार्टनर राहुल धनुका ने GSTAT फाइलिंग में आने वाली प्रक्रियात्मक चुनौतियों, पोर्टल के उपयोग और प्रारंभिक अनुभवों से मिली सीखों को साझा किया। वहीं कंपनी के पार्टनर सुदीप्त भट्टाचार्जी ने मजबूत दस्तावेजीकरण, साक्ष्य प्रस्तुत करने की रणनीति और कानूनी तर्कों की तैयारी पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सही तैयारी से कर विवादों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

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कर अनुपालन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों ने कहा कि GSTAT केवल एक अपीलीय मंच नहीं, बल्कि भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और व्यवसाय-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को कानूनी समय-सीमा, दस्तावेजी मानकों, डिजिटल पोर्टल के उपयोग और विवाद प्रबंधन की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि मजबूत कर अनुपालन को कॉर्पोरेट गवर्नेंस का हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है। इस सत्र ने क्षेत्रीय उद्योगों और पेशेवरों को बदलते कर वातावरण के अनुरूप तैयार होने तथा कानूनी जोखिमों को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक उपकरण उपलब्ध कराए। कार्यक्रम को उद्योग जगत द्वारा अत्यंत उपयोगी और समयानुकूल पहल बताया गया।

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