चाईबासा : मंडल कारा में बंदियों को कानून का पाठ, निःशुल्क विधिक सहायता से लेकर जमानत व अपील के अधिकारों की दी गई विस्तृत जानकारी…

चाईबासा / Balram Panda : झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के निर्देश एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मौहम्मद शाकिर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), चाईबासा द्वारा मंडल कारा में बंदियों के लिए विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, 90 दिवसीय विशेष विधिक जागरूकता अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों से अवगत कराना तथा न्याय तक उनकी सहज पहुंच सुनिश्चित करना था.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रवि चौधरी ने कहा कि प्रत्येक पात्र एवं आर्थिक रूप से कमजोर बंदी को निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करना उसका संवैधानिक अधिकार है, उन्होंने बताया कि जिन बंदियों के पास अधिवक्ता उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें डीएलएसए के माध्यम से योग्य अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है, ताकि किसी भी व्यक्ति को आर्थिक अभाव के कारण न्याय से वंचित न होना पड़े.
उन्होंने बंदियों को जमानत, उच्च न्यायालय में अपील, पैरोल, विधिक सहायता योजनाओं तथा न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी, साथ ही एलएडीसी (लीगल एड डिफेंस काउंसिल) योजना की उपयोगिता बताते हुए बंदियों से अपने मामलों की नियमित जानकारी लेने तथा आवश्यकता पड़ने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क करने की अपील की.
रवि चौधरी ने कहा कि विधिक जागरूकता केवल अधिकारों की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, उन्होंने बंदियों से कानून का सम्मान करने, सकारात्मक सोच अपनाने तथा सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन व्यतीत करने का आह्वान किया, कार्यक्रम के दौरान बंदियों की कानूनी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया.
कार्यक्रम के उपरांत सचिव रवि चौधरी ने मंडल कारा की रसोई, भोजन की गुणवत्ता तथा अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, निरीक्षण के दौरान उन्होंने कारा प्रशासन द्वारा बंदियों के लिए उपलब्ध कराई जा रही व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए.
इस अवसर पर एलएडीसी के उप अधिवक्ता, कारा के अधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार से जुड़े अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे, कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को न्यायिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई.




