
जादूगोड़ा: यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) के बांदु-हुराग यूरेनियम प्रोजेक्ट से वर्ष 2013 में हटाए गए 226 ठेका मजदूरों के मामले में धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट-01 से मजदूरों के पक्ष में फैसला आने की जानकारी सामने आई है। मामले में कोर्ट ने ठेका कंपनी गल्फ ऑयल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को तीन महीने के नोटिस पेमेंट समेत अन्य लाभ की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।
बताया गया कि आदेश के तहत 226 मजदूरों को कुल करीब ढाई करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। प्रति मजदूर करीब एक लाख रुपये की राशि का भुगतान अगले तीन महीने के भीतर किए जाने की बात कही गई है।
2013 में स्थायीकरण की मांग को लेकर दर्ज हुआ था मामला
मजदूरों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में बांदु-हुराग यूरेनियम प्रोजेक्ट में कार्यरत 226 ठेका मजदूरों ने स्थायीकरण की मांग को लेकर झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के बैनर तले चाईबासा स्थित केंद्रीय सहायक श्रमायुक्त कार्यालय में शिकायत वाद दर्ज कराया था।
मजदूरों का आरोप है कि स्थायीकरण की मांग उठाने के बाद उन्हें ठेका कंपनी गल्फ ऑयल कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड के माध्यम से काम से हटा दिया गया। इसके बाद मजदूरों ने नियोजन, स्थायीकरण और तीन महीने के नोटिस पेमेंट समेत अन्य लाभ को लेकर कानूनी लड़ाई जारी रखी।
चाईबासा से धनबाद ट्रिब्यूनल तक पहुंचा मामला
मामला आगे चलकर केंद्रीय श्रम विभाग के माध्यम से धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट तक पहुंचा। करीब 13 साल बाद मामले में फैसला आने की बात कही गई है। मजदूरों की ओर से इस मामले की पैरवी झारखंड कार्यकारी मजदूर यूनियन के महासचिव डीसी गुहाई और संयुक्त सचिव सागर बेसरा द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई।
मजदूर नेताओं के अनुसार, कोर्ट के फैसले से लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे मजदूरों को राहत मिली है।
बांदु-हुराग और आसपास के गांवों में खुशी
फैसले की जानकारी सामने आने के बाद यूसीआईएल के विस्थापित और प्रभावित गांवों बांदु-हुराग, तुरामडीह, तालसा और पुड़ीहासा में खुशी का माहौल होने की बात कही गई है।
मजदूर नेताओं ने बताया कि फैसले की खुशी में 27 सितंबर को तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट कॉलोनी गेट के समक्ष कार्यक्रम आयोजित कर जश्न मनाने की तैयारी की जा रही है।
डीसी गुहाई और सागर बेसरा ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले से मजदूरों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि फैसले के बाद प्रबंधन और ठेका कंपनी के स्तर पर मजदूरों से जुड़े मामलों में मनमानी पर रोक लगेगी।




