चाईबासा में करमा पर्व फुटबॉल प्रतियोगिता का रोमांचक फाइनल, कुम्हार टोली ने गुटवा बिशुनपुर को पेनल्टी शूटआउट में 5-4 से हराया
सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन ग्राउंड में दो दिवसीय प्रतियोगिता सह मिलन समारोह का समापन, 40 टीमों ने लिया हिस्सा

चाईबासा: शहीद राम भगवान केरकेट्टा करमा पर्व के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय फुटबॉल एवं खेलकूद प्रतियोगिता सह मिलन समारोह शनिवार को सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन ग्राउंड में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में कुल 40 टीमों ने हिस्सा लिया। फाइनल मुकाबले में कुम्हार टोली चाईबासा ने गुटवा बिशुनपुर, गुमला को पेनल्टी शूटआउट में 5-4 से हराकर खिताब अपने नाम किया।
पेनल्टी शूटआउट में हुआ विजेता का फैसला
फाइनल मुकाबले में कुम्हार टोली चाईबासा और गुटवा बिशुनपुर, गुमला की टीमें आमने-सामने थीं। दोनों टीमों ने बेहतर खेल का प्रदर्शन किया, लेकिन निर्धारित समय तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट का सहारा लिया गया।
पेनल्टी शूटआउट में कुम्हार टोली चाईबासा ने 5-4 से जीत दर्ज की। विजेता और उपविजेता टीम को ट्रॉफी एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
उपायुक्त मनीष कुमार ने खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं
समापन समारोह में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार की विशेष गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने फाइनल में पहुंची दोनों टीमों से मुलाकात कर खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं और उरांव समाज द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
करमा पर्व प्रकृति और भाईचारे का संदेश देता है
समापन समारोह के मुख्य अतिथि चक्रधरपुर नगर परिषद के अध्यक्ष सनी उरांव ने कहा कि करमा पर्व प्रकृति, भाईचारे और सामुदायिक एकजुटता का पर्व है। ऐसे आयोजनों से समाज के लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि खेल प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ अनुशासन और टीम भावना सीखने का अवसर मिलता है।
विशिष्ट अतिथि अपर पुलिस अधीक्षक चाईबासा राहुल देव बड़ाईक ने कहा कि करमा पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने युवाओं से खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की।
सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर
समाजसेवी एवं जिला झारखंड वैश्य संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सुनील प्रसाद साव ने कहा कि मिलन समारोह समाज में आपसी भाईचारा और सद्भाव बढ़ाने का माध्यम है। करमा पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक जीवन की भावना को मजबूत करता है।
केंद्रीय सरना समिति रांची की महिला मोर्चा अध्यक्ष एंजेल लकड़ा ने कहा कि करमा पर्व आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा और प्रकृति से जुड़े जीवन का प्रतीक है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं की जानकारी मिलती है।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में उपायुक्त मनीष कुमार, सरना समिति चक्रधरपुर के अध्यक्ष बिमल खलखो, आदिवासी हो समाज युवा महासभा के अध्यक्ष इपील सामाड़ और महासचिव गब्बर सिंह हेम्ब्रम मौजूद रहे।
मानद अतिथि के रूप में त्रिशानू रॉय, अनिल उरांव, मोनिका बोईपाई, रंजीत उरांव और रामदास उरांव शामिल हुए।
आयोजन में योगदान देने वालों को किया गया सम्मानित
सचिव अनिल लकड़ा ने सचिव प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रतियोगिता के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले लोगों के प्रति आभार जताया। इस अवसर पर सातों अखाड़ा के मंगल खलखो, दुर्गा कुजूर, रमेश कुजूर, भगवान दास तिर्की, उपदेश लकड़ा और दिलीप बरहा को सम्मानित किया गया।
आयोजन को सफल बनाने में संचू तिर्की, सहदेव किस्पोट्टा, लालू कुजूर, दुर्गा खलखो, सुमित बरहा, विष्णु मिंज, लक्ष्मण बरहा, रोहित खलखो, बाबूलाल बरहा, महेश तिर्की, पंकज खलखो, शंभू टोप्पो, ईशु टोप्पो, पालट खलखो, महावीर बरहा, मथुरा कोया, विजय लक्ष्मी लकड़ा, निर्मला लकड़ा, सुमित्रा एक्का, लक्ष्मी बरहा, तोजो तिर्की, सावित्री कच्छप, चंद्रो कुजूर और ननकी लकड़ा का सराहनीय योगदान रहा।




