*मंडल कारा में बंदियों को दिया जाएगा बागवानी का प्रशिक्षण*

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की ओर से संचालित ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन-हुनर से पहचान’ के तहत मंडल कारा चाईबासा में बंदियों के कौशल विकास और सकारात्मक बदलाव के उद्देश्य से छह दिवसीय व्यवसायिक बागवानी प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ शुक्रवार को किया गया। उपायुक्त मनीष कुमार ने दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन किया। मौके पर जेल अधीक्षक सुनील कुमार और बैंक ऑफ इंडिया-आरसेटी के प्रशिक्षक मौजूद रहे।

यह प्रशिक्षण शिविर 4 से 9 सितंबर तक चलेगा। इसमें मंडल कारा के 40 बंदियों को फल एवं सब्जी उत्पादन तथा जैविक खाद निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को रोजगारपरक कौशल से जोड़ना है, ताकि सजा पूरी करने के बाद वे स्वरोजगार या अन्य रोजगार के माध्यम से सम्मानजनक जीवन जी सकें।
जिला प्रशासन के अनुसार मंडल कारा में ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन-हुनर से पहचान’ के तहत यह तीसरा प्रशिक्षण शिविर है। इसके माध्यम से बंदियों को विभिन्न रोजगारपरक गतिविधियों और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करना है।
प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि प्रोजेक्ट परिवर्तन के माध्यम से बंदियों को उपयोगी और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बंदियों से जीवन में हुई गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने और भविष्य में गलतियों को दोहराने से बचने की अपील की। उन्होंने प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा प्राप्त ज्ञान और कौशल का बेहतर उपयोग कर भविष्य को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद उपायुक्त ने मंडल कारा परिसर में संचालित सिलाई केंद्र और कपड़ा निर्माण केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां संचालित गतिविधियों और बंदियों को दिए जा रहे कौशल प्रशिक्षण की जानकारी ली।
इस दौरान उपायुक्त ने मंडल कारा के सीसीटीवी कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कारा परिसर की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी लेते हुए व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन-हुनर से पहचान’ के माध्यम से बंदियों को कौशल विकास से जोड़कर उनके सकारात्मक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है।




